SP का अधिवेशन: अखिलेश यादव के फिर अध्‍यक्ष चुने जाने की संभावना….

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Uttar Pradesh Chief Minister Akhilesh Yadav addressing a press conference at his official residence in Lucknow on saturday.Express photo by Vishal Srivastav 17.09.2016

सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया कि बृहस्पतिवार को आयोजित होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के संविधान में संशोधन करके दल के अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल से बढ़ाकर पांच साल किया जाएगा

आगरा: समाजवादी पार्टी (सपा) संरक्षक मुलायम सिंह यादव के ‘आशीर्वाद’ के दावे के साथ 5 अक्‍टूबर को आयोजित होने वाले सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश यादव को ही पार्टी का अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है. सपा के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन से पहले पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बुधवार को बैठक होगी, जिसमें विभिन्‍न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी. सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया कि बृहस्पतिवार को आयोजित होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के संविधान में संशोधन करके दल के अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल से बढ़ाकर पांच साल किया जाएगा.

अखिलेश ने पिछले दिनों अपने पिता मुलायम को राष्ट्रीय अधिवेशन का न्यौता देने के बाद दावा किया था कि उन्हें सपा संरक्षक का आशीर्वाद हासिल है. मुलायम ने भी गत 25 सितंबर को संवाददाता सम्मेलन में अखिलेश के मुखालिफ शिवपाल सिंह यादव के धड़े को झटका देते हुए कहा था कि पिता होने के नाते उनका आशीर्वाद पुत्र के साथ है. ऐसे में पूरी संभावना है कि अखिलेश को एक बार फिर सपा का अध्‍यक्ष चुन लिया जाएगा. कार्यकाल बढ़ाये जाने के बाद यह भी तय हो जाएगा कि सपा वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव और 2022 का उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भी अखिलेश के नेतृत्‍व में लड़ेगी.

अखिलेश गत एक जनवरी को लखनऊ में आयोजित राष्‍ट्रीय अधिवेशन में मुलायम की जगह सपा के अध्‍यक्ष बने थे, जबकि मुलायम को पार्टी का ‘संरक्षक’ बना दिया गया था. साथ ही शिवपाल को सपा के प्रांतीय अध्‍यक्ष पद से हटा दिया गया था.

अखिलेश और शिवपाल के बीच रस्‍साकशी

सपा का यह अधिवेशन ऐसे समय हो रहा है जब पार्टी में अखिलेश और शिवपाल धड़ों में रस्‍साकशी का दौर जारी है. फिलहाल हालात अखिलेश के लिये साजगार (उनके पक्ष में) नजर आ रहे हैं. माना जा रहा था कि खुद को सपा के तमाम मामलों से अलग कर चुके मुलायम गत 25 सितंबर को लखनऊ में हुए संवाददाता सममेलन में अलग पार्टी या मोर्चे के गठन का एलान करेंगे लेकिन उन्‍होंने ऐसा करने से इनकार करके शिवपाल खेमे को करारा झटका दे दिया.

 

मुलायम के सहारे ‘समाजवादी सेक्‍युलर मोर्चे’ के गठन की उम्‍मीद लगाये शिवपाल पर अब अपनी राह चुनने का दबाव है. शिवपाल के करीबियों का कहना है कि सपा के 5 अक्‍टूबर को होने वाले राष्‍ट्रीय अधिवेशन के बाद वह कोई फैसला ले सकते हैं.

बहरहाल, अखिलेश पूरे आत्‍मविश्‍वास में हैं. पिछली 23 सितंबर को लखनऊ में आयोजित सपा के प्रान्‍तीय अधिवेशन में उन्‍होंने शिवपाल यादव गुट को ‘बनावटी समाजवादी’ की संज्ञा देते हुए समर्थक कार्यकर्ताओं ‘बनावटी समाजवादियों’ के प्रति आगाह किया था.

अखिलेश ने पिछले दिनों सपा के आठवें प्रांतीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा था, “कई बार लोग सवाल उठाते हैं….मैं उनसे यही कहना चाहता हूं कि नेताजी (मुलायम) हमारे पिता तो रहेंगे ही, उनका आशीर्वाद भी बना रहेगा, तो हम समाजवादी आंदोलन को बढ़ाएंगे और नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे.” अखिलेश ने शिवपाल यादव गुट पर निशाना साधते हुए किसी का नाम लिए बगैर कहा था,, “हम यह भी कहना चाहेंगे कि हमें बनावटी समाजवादियों से सावधान रहना है. मैं बनावटी समाजवादियों के लिए कहना चाहूंगा कि उन्होंने कई कोशिशें और साजिशें कीं कि समाजवादी आंदोलन थम जाए. वे एक साजिश में तो कामयाब हो गए कि हम सत्ता में नहीं आ पाए, लेकिन अब सभी समाजवादियों की आंख खुल गई है और अब वे भविष्य में किसी भी साजिश में कामयाब नहीं हो सकते.”

अखिलेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफा देने के बाद रिक्त हुई गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव की तैयारियों में जुटने का आह्वान किया था. माना जा रहा है कि इस राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन में इसकी तैयारियों की रूपरेखा तय हो सकती है.

 

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