RSS प्रमुख मोहन भागवत आरक्षण का समर्थन करते हुए देश की एकता पर मारा तमाचा..

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के दिये गये संदेश को देश  का प्रत्येक नागरिक समझता हैं जहाॅ पर RSS जनता के एक बडे वर्ग को भेदभाव से बचाने की बात करती हैं, भेदभाव के शिकार पिछड़े वर्ग के लोगों को समाज में बराबरी का दर्जा दिलाने के लिए आरक्षण की वकालत करती हैं जातिगत छुआ.छूत के चलते अपने ही समाज का एक बड़ा वर्ग पिछड़ गया । जनता RSS प्रमुख से जानना चाहती हैं। देश को हर स्तर में भेदभाव किस समाज ने दिया। आज RSS एक बहुत बडा संगठन हैं जिसमें सभी जाति और वर्ग के लोग हैं लेकिन एक ब्रहमणवादी विचारधारा वाले प्रमुख समाज को यह बताये कि आखिर RSS  में आज तक कितने राष्ट्रीय अध्यक्ष अन्य समाज के लोग रहे हैं समाज को एक करने के लिये कितने पिछडे और दलित समाज के लोग RSS प्रमुख रहे हैं। जातिगत राजनीति करना समाज की अखण्डता के लिए दुर्भाग्य है। जातिगत को दूर करना हैं तो मंदिरों में दलित समाज को लाने के पक्ष की सबसे पहले पहल करें।

मोहन भागवत के बाद नीतीश कुमार ने प्रावेट सेक्टर मेें भी 50% आरक्षण होने की बात कही..

RSS प्रमुख राजनीति में अपनी पकड मजबूत करने के लिए आरक्षित वर्ग के वोट बैंक का काम कर रहा हैं, समाज समझता हैं। अधिकांश RSS अपने भाषणों का उपयोग चुनाव के समय करता हैं। डाॅ भीमराव जी ने समाज को स्तर देने के लिए आरक्षण की मांग की थी और उनको आरक्षण मिलना चाहिए था किन्तु समय के अनुसार आज आरक्षण की नहीं बल्कि सही दिशा निर्देशन की आवश्यकता हैं उस  समाज से जिससे भेदभाव ना हो। कभी उन समाज के बारे भी बात की जानी चाहिए जो अर्थिक आरक्षण की बात को आगे रखते हैं। आर्थिक आधार समाज में एकरूपता लाने के लिए एक उचित आधार हैं।
RSS हिन्दूवादी होने का दिखावा बन्द करे जहाॅ देश के स्वाभिमान पर अंकुश लगाया जा रहा हैं वहाॅ RSS प्रमुख का कोई बयान अभी तक सामने नहीं आया हैं ना  ही हिन्दू समाज की रक्षा के लिए पदमावती फिल्म जो हिन्दू सामज को दूषित करने का काम कर रही हैं RSS की   कोई प्रतिक्रिया देखने में नहीे आयी हैं क्या RSS का हिन्दू समाज पर मात्र एक ढोंग हैं। पदमावती मुददे पर मोहन भागवत जी की चुप्पी सिर्फ एक राजनीतिक हिस्सेदारी के सिवा कोई संदेश नहीे देती हैं।

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