ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी ले भी सहा हैं तीन तलाक और हलाला का की पीडा

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मीना कुमारी की शादी   निर्देशक कमाल अमरोही से हुई थी.  उनके शौहर कमाल अमरोही ने गुस्से में आकर तीन बार तलाक बाले दिया और उनका तलाक हो गया.

‘ट्रेजडी क्‍वीन’ के नाम से फिल्‍मी दुनिया का जाना माना नाम मीना कुमारी पर्दे पर अपने हर अंदाज के लिए तारीफें बटोरती रहीं, लेकिन अपने जीवन में उनके साथ हुई एक घटना ने इस ‘सुपरस्‍टार’ को मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़कर रख दिया था. इन दिनों देश में ‘तीन तलाक’ की वैधता पर कानूनी जंग चल रही है. तीन तलाक वैध है या नहीं, इस पर आज सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संसद के नए कानून बनाने तक तीन तलाक पर रोक लगा दी है. बता दें कि सालों पहले मीना कुमारी उर्फ महजबीं बानो भी ‘तीन तलाक’ और ‘हलाला’ की प्रथा से गुजर चुकी हैं.

मीना कुमारी की शादी फिल्‍म ‘पाकीजा’ के निर्देशक कमाल अमरोही से हुई थी. एक बार मीना कुमारी को उनके शौहर कमाल अमरोही ने गुस्से में आकर तीन बार तलाक बाले दिया और उनका तलाक हो गया. फिर बाद में पछतावा होने पर उन्होंने मीना कुमारी से निकाह करना चाहा. लेकिन तब इस्लामी धर्म गुरुओं द्वारा बताया गया कि इसके लिए पहले मीना कुमारी का ‘हलाला’ करना पड़ेगा. तब कमाल अमरोही ने मीना कुमारी का निकाह अपने दोस्त अमान उल्ला खान (जीनत अमान के पिता) से करवाया. मीना कुमारी को अपने नए शौहर के साथ हम बिस्तर होना पड़ा था और फिर इद्दत यानी मासिक आने के बाद उन्होंने अपने नए शौहर से तीन तलाक लेकर अपने पुराने शौहर कमाल अमरोही से दुबारा निकाह किया.

 मीना कुमारी ने लिखा था, ‘ जब मुझे धर्म के नाम पर, अपने जिस्म को, किसी दूसरे मर्द को भी सौंपना पड़ा, तो फिर मुझमें और वेश्या में क्या फर्क रहा ? इस दुर्घटना ने मीना कुमारी को मानसिक रूप से तोड़कर रख दिया था और फिर मानसिक शांति के लिए वह शराब पीने लगीं थी. मानसिक तनाव और शराब ही उनकी अकाल मौत की वजह बनी थी और सिर्फ 39 साल की उम्र में 1972 में मीना कुमारी दुनिया छोड़ कर चली गईं.
क्‍या है हलाला  वर्तमान मुस्लिम पर्सनल लॉ के प्रावधानों के अनुसार अगर किसी मुस्लिम महिला का तलाक हो चुका है और वह अपने उसी शौहर से दोबारा निकाह करना चाहती है, तो उसे पहले किसी और शख्स से शादी कर हम बिस्‍तर होना पड़ता है. इसके बाद वह इस पति से तलाक लेकर फिर से अपने पुराने पति से विवाह कर सकती है. इसे निकाह हलाला कहते हैं.
तीन तलाक के मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का केंद्र सरकार ने स्वागत किया है. सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय और कानून मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संतोषजनक बताया है. सरकार कहना है कि देश की सर्वोच्च अदालत ने महिलाओं के हक में फैसला सुनाया है. यह लैंगिक बराबरी और सम्मान का मामला है. ध्यान रहे कि मंगलवार को कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि एक साथ तीन तलाक असंवैधानिक है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तीन तलाक पर छह महीने के लिए रोक लगा दी है. कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह तीन तलाक पर कानून बनाए. सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई कि केंद्र जो कानून बनाएगा उसमें मुस्लिम संगठनों और शरिया कानून संबंधी चिंताओं का खयाल रखा जाएगा. केंद्र ने राजनीतिक दलों से अपने मतभेदों को दरकिनार रखने और तीन तलाक के संबंध में कानून बनाने में केन्द्र की मदद करने को कहा है.


कोर्ट ने कहा कि अगर छह महीने में कानून नहीं बनाया जाता है तो तीन तलाक पर शीर्ष अदालत का आदेश जारी रहेगा. कोर्ट ने कहा कि इस्लामिक देशों में तीन तलाक खत्म किए जाने का हवाला दिया और पूछा कि स्वतंत्र भारत इससे निजात क्यों नहीं पा सकता. कोर्ट में 3 जज इसे अंसवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे, वहीं 2 जज इसके पक्ष में नहीं थे. इससे पूर्व 11 से 18 मई तक रोजाना सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए बुधवार का दिन मुकर्रर किया था.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय में शादी तोड़ने के लिए यह सबसे खराब तरीका है. ये गैर-ज़रूरी है. कोर्ट ने सवाल किया कि क्या जो धर्म के मुताबिक ही घिनौना है वह कानून के तहत वैध ठहराया जा सकता है? सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि कैसे कोई पापी प्रथा आस्था का विषय हो सकती है.

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