ये हैं पांच महिलाएं जिन्होंने बदल दिया तीन तलाक का इतिहास

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सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने तीन तलाक पर अपना फैसला सुना दिया है। पीठ के तीन जजों ने एक बार में तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुए इसे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन माना है, जबकि मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर सहित एक अन्य जज की राय इससे अलग रही। चीफ जस्टिस ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार के पाले में डालते हुए कहा कि केंद्र और संसद को ही इस मुद्दे पर कानून बनाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के साथ ही तीन तलाक को लेकर लंबे समय से अपने अधिकारों और न्याय की लड़ाई लड़ रही हजारों मुस्लिम महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान दौड़ गई। कोर्ट के फैसले से पीड़ित महिलाओं के साथ-साथ उनके परिजनों में भी खुशी देखी गई। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय पांच मुस्लिम महिलाओं की याचिकाओं पर सुनाया, जिनकी जिंदगी तीन तलाक के कारण दोजख बन गई थी। आपको बताते हैं उन महिलाओं के बारे में जिनकी याचिका पर कोर्ट ने यह एतिहासिक फैसला सुनाया।

शायरा बानो
उत्तराखंड की रहने वाली शायरा बानो ने मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक, निकाह हलाला और बहु-विवाह के प्रचलन को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग की थी। शायरा बानों की कहानी त्रासदियों से भरी है। शायरा को उसके पति रिजवान ने तीन तलाक देकर घर से बेदखल कर दिया था। शायरा ने बताया कि उसका छह बार गर्भपात कराया गया। उसके दो बच्चे हैं जिन्हें पति ने अपने पास रख लिया। शायरा का कहना है कि वह अपने बच्चों को साथ रखना चाहती है। शायरा ने मुस्लिम पर्सनल लॉ एप्लीकेशन कानून,1936 की धारा-दो की संवैधानिकता को चुनौती दी थी।आफरीन रहमान

जयपुर की रहने वाली आफरीन भी तीन तलाक का शिकार हुई उन महिलाओं में से हैं जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। आफरीन ने बताया कि इंदौर में रहने वाले उसके पति ने स्पीड पोस्ट के जरिए उसे तलाक का पत्र भेजा था। आफरीन ने बताया कि मेट्रीमोनियल साइट के जरिए उन लोगों का रिश्ता तय हुआ था। शादी के बाद उसे दहेज के लिए तंग किया जाने लगा। जब ससुराल वालों की मांग पूरी नहीं हुई तो स्पीड पोस्ट पर तलाक भेजकर उससे छुटकारा पा लिया गया।इशरत जहां:
पश्चिम बंगाल के हावड़ा की रहने वाली इशरत को उसके पति ने दुबई से फोन पर तलाक दे दिया था। इतना ही नहीं उसके पति ने चारों बच्चों को उससे छीन लिया। इसके बाद पति ने दूसरी शादी कर ली और उसे यूं ही बेसहारा छोड़ दिया। इशरत ने याचिका दायर कर तीन तलाक को असंवैधानिक और मुस्लिम महिलाओं के गौरवपूर्ण जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन बताया था।
आतिया साबरी
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की रहने वाली आतिया के पति ने साल 2016 में एक कागज पर तीन तलाक लिखकर उससे रिश्ता तोड़ लिया था। साल 2012 में दोनों की शादी हुई थी। उनकी दो बेटियां हैं। आतिया का आरोप है कि दो बेटी होने से उसके पति और ससुर नाराज थे। ससुरालवाले आतिया को घर से निकालना चाहते थे। उसे जहर खिलाकर मारने की भी कोशिश की गई थी।

गुलशन परवीन:
उत्तर प्रदेश के रामपुर की रहने वाली गुलशन को उसके पति ने नोएडा से दस रुपये के स्टांप पेपर पर लिखकर तलाकनामा भेज दिया था। पति नोएडा में काम करता था। गुलशन की शादी 2013 में हुई थी। गुलशना का आरोप है कि पति शुरू से ही उसे पसंद नहीं करता था, इसीलिए बिना किसी बात के तीन साल बाद अचानक स्टांप पेपर पर तीन तलाक लिखकर भेज दिया। उसका दो साल का बेटा है।

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