विधि विधानपूर्वक मनाई गयी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी……………..

0
45
views

गीता भवन में हुई श्री कृष्ण अवतार की प्रस्तुति
सांई मंदिर में हुआ भजन संध्या का आयोजन”

देहरादून 14 अगस्त। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव द्रोण नगरी में आपार हर्षोल्लास एवं विधि विधानपूर्वक पूर्वक मनाया गया। जहां मंदिरों में भव्य झांकियों का आयोजन हुआ वहीं गीता भवन में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भजन संध्या का आयोजन किया गया। कल आजद्ध गीता भवन मंदिर में मेघदूत नाट्य संस्था की ओर से श्रीकृष्ण अवतार की प्रस्तुति दी जायेगी। सांई मंदिर में भी भजन संध्या का आयोजन किया गया।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व गुरू द्रोणाचार्य की तपस्थली द्रोण नगरी में प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी आपार हर्षोल्लास और विधि विधानपूर्वक मनाई गयी। किशन नगर चैक स्थित आत्माराम धर्मशाला में भव्य झांकियों का आयोजन किया गया साथ ही भगवान भोलेनाथ की आकर्षक एवं मनमोहक झांकी भी प्रदर्शित की गयी। वहीं सहारनपुर चैक स्थित श्री पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर में श्री पृथ्वीनाथ जी सेवादल के द्वारा भव्य झांकियों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंदिर को भव्य रूप से बिजली की लड़ियों व पुष्पों से सजाया गया। मंदिर में प्रदर्शित की गयी अनेक झांकियां श्रद्धालुुओ को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। इस अवसर पर प्रसि( कला का श्रीमती बीना अग्रवाल के द्वारा छोटे छोटे बच्चों के माध्यम से आकृषक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गयी। मध्य रात्रि में बाल स्वरूप कान्हा जी की प्रतिमा का दूध्, दही, घी, शहद, पंचामृत के साथ ही पवित्रा गंगाजल से विशेष अभिषेक कर पूजा अर्चना की गयी तदुपरांत आरती की गयी। रात्रि में पंचामृत, माखन, मिश्री के साथ ही सूखा धनिया, प्रसाद के रूप में वितरीत किया गया। सेवादल के संजय गर्ग ने बताया कि कल आज रात्रि में मथुरा, वृंदावन के कलाकारों द्वारा भव्य नंदोत्सव प्रस्तुत किया जायेगा जिसमें माखन चोर लीला, डांडिया नृत्य, मयूर नृत्य, शिव बारात आदि के साथ ही अंत में श्रद्धालुुओ के साथ फूलों की होली खेली जायेगी उन्होंने बताया कि कान्हा जी का पालना भी विशेष होगा। जिस पालने में कान्हा जी को विराजमान किया जायेगा। जिसको मयूर पंख, गुब्बारों, पुष्पों आदि से सजाया जायेगा। जिसके श्रृंगार की समस्त सामग्री सहानपुर जनपद से मगायी गयी हैं। वहीं किशन नगर चैक स्थित आत्माराम धर्मशाला में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष पर आकर्षक झांकियों के साथ ही एक शाम बांके बिहारी के नाम संध्या का आयोजन किया गया। वहीं गीता भवन श्री सनातन धर्म सभा के द्वारा श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनाया गया। रात्रि 8.30 बजे से भजन संध्या का आयोजन किया गया। वहीं झंडा बाजार में युवा कल्याण समिति के द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मनाया गया और आकर्षक झांकिया सजाई गयी। तिलक रोड़ स्थित श्री गंगा प्राचीन मंदिर में भी झांकियों का आयोजन किया गया। हनुमान चैक स्थित हनुमान मंदिर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनायी गयी। तिलक रोड़ स्थित श्री सांई मंदिर में भी भजन संध्या का आयोजन किया गया। शहर के विभिन्न मंदिरों में श्री कृष्ण, राध की भव्य झाकियां सजाई गयी जिन्हें देखने के लिये देर रात तक श्रद्धालुुओ पंक्तिब( होकर अपनी बारी की इंतजार कर रहे थें। आचार्य शिव प्रसाद मंमगाई का कहना हैं कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व दो दिन मनाया जा रहा है। आज रात से कृष्ण अष्टमी शुरू हो रही हैं जो बृहस्पतिवार तक जारी रहेगी। इसलिये जन्माष्टमी का मुख्य पर्व आज ही मनाया गया। श्री कृष्ण जन्म के अष्टमी तिथि को ही मान्यता दी गयी है। जन्माष्टमी का व्रत आज किया गया है। रात्रि 9.17 बजे से अष्टमी शुरू हुई जो कल ;आजद्ध 8.05 पर खत्म हो जायेगी। इसलिये जन्माष्टमी का मुख्य पर्व आज ही मनाया गया। आज गृहस्थियों ने व्रत रखा है। वहीं दुसरी और आचार्य डाॅ. सुशांत राज ने श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर कहा कि समय के साथ जीवन और मृत्यु का चक्र प्रति पल कहीं न कहीं मूर्त रूप लेता है। यह लीला है आम जीवधरियों की। किन्तु अवतारी सत्ता किसी विशिष्ट समय पर किसी विशिष्ट प्रयोजन से किसी विशिष्ट काल के लिए ही शरीर धरण करती है और अपने अभीष्ट प्राप्ति के उपरान्त पलायन कर जाती है। अवतारी पुरुष श्रीकृष्ण ऐसी ही महान आत्माओं में थे जिनने जन्म के समय से ही इतिहास बनाना शुरू कर दिया था। वे सदा विषम परिस्थितियों से जूझे और उनको सुगम बनाया। बिगड़ती समाज व्यवस्था को सहज साम्यवाद में प्रतिष्ठित किया। जन मानव को विषमता से लडने की प्रेरणा प्रस्तुत की। सिखाया कि जीवन सिर्फ पफूलों का गुलदस्ता नहीं है, काँटों से भरी राह भी है जिस पर चलना अनिवार्य होता है। मनुष्य जीवन की  अवधि में  वैसे ही हजारों समस्याएँ आ घिरती जाती हैं जिनका समाधन करके जीना आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य होता है। हालाँकि ये समस्यायें ऐसी नहीं होतीं जिनका समाधन न हो सके। प्रयत्न पुरुषार्थ से स्वर्ग की गंगा जब ध्रती पर लायी जा सकती है, समुद्र को सूखाया जा सकता है, उस पर सेतु बाँध जा सकता है, तो जीने की राह में आने वाली समस्याओं का समाधन करना कोई असम्भव नहीं है। पिफर भी प्रयत्न पुरुषार्थ की जरूरत होती ही है। यह त्यागी तपस्वियों का मार्ग है। संयमी, संन्यासी इसी पर चलते हैं। उनको न परिस्थितियों से लडना पड़ता है, न परिस्थितियों का शिकार बनना होता है। सारी परिस्थितियाँ एक तरपफ, वे चलते हैं अपनी स्थितियाँ निर्मित करते हुए, अपना मार्ग स्वयं बनाते हुए। श्रीकृष्ण ने प्रवृत्ति और निवृत्ति के मार्ग दिखाए हैं जिसे अपनी इच्छानुसार स्वीकार किया जा सकता है। उन्होंने मध्यरात्रि के घने अंधेरे में अवतरित हुए और समग्र मानवता के लिए उजाला बिखेरा। जो उनके प्रकाश में आये, वे प्रकाशित होते गये। आज भी जो लोग उनकी प्रेरणाओं पर अमल कर रहे हैं, वे सुख चैन का जीवन जी रहे हैं। उनकी प्रेरणा है अंधकार में प्रकाश फैलाओ। उससे पहले अपना दिया स्वयं जलाओ और उससे चारों ओर रोशनी फैलाओ। यह प्रेरणा उनकी जन्माष्टमी मनाने वक्त जरूर याद करनी चाहिए।
भगवान श्री कृष्ण का जन्म पृथ्वी पर हो रहे अनाचार, अत्याचार को खत्म करने के लिये हुआ था। उन्होेंने यु( के मैदान में अर्जुन को उपदेश दिये वह आज भी एक संशय ग्रस्त मानव के लिये अत्यन्त उपयोगी है। मनुष्य को अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने का कार्य उनका योगेश्वर रूप करता है। स्वंय लीला पुरूषोत्तम भगवान श्री कृष्ण ने बचपन से लेकर गो लोक दमन तक ऐसी अद्भूत लीलाएं की कि सबने एक स्वर में उन्हें योगेश्वर कहा। मान्यता है कि देवता भी योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का संपूर्ण रहस्य नहीं जान पायें। भगवान श्री कृष्ण ने पाण्डवों एवं कौरवों के यु( से पूर्व संशय ग्रस्त अर्जुन को श्री मद्भागवत गीता रूपी योगामृत देकर संपूर्ण विश्व के समक्ष योेग शास्त्रा का सार रख दिया। गीता आज भी हर इंसान की पथ प्रदर्शक बनी हुई है। गीता को योगेश्वर की वाणी कहा जाता है। योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण के श्री मुख से निकली श्री मद भागवत गीता में योगशास्त्रा के मंथन से उत्पन्न योगामृत 18 अध्यायों में विभक्त हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here