IIT से पढ़ाई के बाद जापानी गर्ल से शादी और अब मिला देश की बुलेट ट्रेन का जिम्मा…

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देश की पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के सलाहकार बने बाड़मेर के संजीव सिन्हा

बाड़मेर. देश की पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के सलाहकार बने आईआईटीयन संजीव सिन्हा बाड़मेर के रहने वाले हैं। बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पहली ही कोशिश में आईआईटी में सिलेक्शन हो गया। पिता ग्रिफ में नौकरी करते थे, लेकिन सैलरी कम होने से बैंक से कर्ज लेकर बेटे की आईआईटी की पढ़ाई पूरी करवाई। जिले के पहले आईआईटीयन बने संजीव ने अपनी मां से 25 साल पहले किए वादे को पूरा कर दिखाया। जापानी लड़की को बनाया हमसफर…
बाड़मेर शहर की अंबेडकर कॉलोनी निवासी वीरेंद्र सिन्हा के दो बेटे संजीव और राजीव हैं। राजीव सिन्हा सूरत के एक बैंक में एजीएम है। मां उषा रानी का 14 साल पहले निधन हो गया। पिता वीरेंद्र सिन्हा अकेले रहते हैं। वे जून में ही संजीव से मिलने टोक्यो गए थे। वहां पर बेटे और बहू के साथ एक महीने तक रहने के बाद बाड़मेर लौट आए। आईआईटीयन संजीव ने जापान में शादी की थी। उनकी एक बेटी है।
जापानी रेलवे ने सौंपी इंडिया में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी
– देश की पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर 1 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका जिम्मा जापान रेलवे ने संजीव सिन्हा को सौंपा है।
– टोक्यो में टाटा के फॉर्मर एग्जिक्यूटिव संजीव को जापान रेलवे द्वारा अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट के लिए सलाहकार अपॉइन्ट किया गया है।
– इस मोस्ट अवेटेड प्रोजेक्ट का भूमिपूजन अहमदाबाद में 14 सितंबर को जापान के पीएम शिंजो आबे और भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में होना है। यह प्रोजेक्ट 2023 तक पूरा होना है।
बचपन से ही जिद्दी थे वीरेंद्र
-पिता वीरेंद्र सिन्हा ने भास्कर से बातचीत में कहा कि उनके बेटे की कामयाबी पर पूरे देश को फख्र है। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि बेटा देश की पहली बुलेट ट्रेन का सलाहकार बनेगा।
-वीरेंद्र कहते हैं कि संजीव शुरू से ही जिद्दी था। शुरुआती पढ़ाई से ही उसका परफार्मेंस बेहतरीन था। दसवीं बोर्ड में टॉपर रहा और बारहवीं बोर्ड में स्टेट मेरिट में 8 वें नंबर पर रहा।
-इसके बाद आईआईटी में पहले ही कोशिश में सिलेक्ट हो गया। कानपुर में 5 साल की मेहनत के बाद आईआईटीयन बन गया। वहां से जापान के टोक्यो चले गए। वहां पर कई कंपनियां में काम करने के बाद टाटा में एग्जिक्यूटिव बने।
नाम दर्ज हैं ये रिकॉर्ड्स
-राजस्थान के बाड़मेर जिले से पहले आईआईटीयन बनने का रिकार्ड संजीव के नाम दर्ज है। उनका जन्म 21 जनवरी 1973 को बाड़मेर में हुआ।
-आठवीं तक की पढ़ाई बाल मंदिर स्कूल में की। इसके बाद सीनियर सेकंडरी स्कूल गांधी चौक से बारहवीं की पढ़ाई पूरी की। 1989 में आईआईटी में सिलेक्शन हो गया।
-खास बात यह है कि संजीव ने पढ़ाई के दौरान कोचिंग नहीं ली। सेल्फ स्टडी के जरिए ही पढ़ाई की और हमेशा अव्वल रहे।

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