गुरमीत राम रहीम दोषी करार, डेरा समर्थकों का हंगामा, न्यूज चैनलों की OB वैन तोड़ी

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डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दो महिलाओं से बलात्कार के आरोप में आज पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने दोषी करार दिया है. सजा पर फैसला 28 अगस्त को होगा.

चंडीगढ़: डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दो महिलाओं से बलात्कार के आरोप में आज पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने दोषी करार दिया है. सजा पर फैसला 28 अगस्त को होगा. कोर्ट के भीतर से ही राम रहीम को हिरासत में ले लिया गया है. उन्हें सड़क के रास्ते अंबाला की जेल ले जाया जाएगा.  फैसले के मद्देनजर पंचकूला में डेरा प्रमुख के समर्थक बड़ी संख्या में मौजूद हैं. डेरा के मुख्यालय में भी समर्थक मौजूद हैं. समर्थकों ने फैसले के बाद उत्पात मचाना शुरू कर दिया है. मीडिया कर्मियों को ओबी वैन तोड़ दी है. मीडियाकर्मियों पर भी हमला बोला गया है.

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख बाबा गुरमीत सिंह राम रहीम पर साध्वी के सेक्शुअल हैरेसमेंट का आरोप लगा है।

नई दिल्ली.डेरा सच्चा सौदा के चीफ गुरमीत सिंह राम रहीम को सेक्शुअल हैरेसमेंट केस में सीबीआई कोर्ट ने दोषी करार दिया। राजस्थान के गंगानगर के रहने वाले गुरमित सिंह ने 1990 में डेरा की गद्दी संभाली थी। इसके बाद से आज तक डेरा और उसके चीफ राम रहीम सिंह कई विवादों में रहे। राम रहीम पर आश्रम की साध्वी के सेक्शुअल हैरेसमेंट का आरोप है। शुक्रवार को इस पर पंचकूला की सीबीआई कोर्ट ने फैसला दिया। राम रहीम अब हिरासत में हैं। सजा पर फैसला बाद में होगा। बता दें कि डेरा सच्चा सौदा की नींव 1948 में शाह मस्ताना ने की थी। दो राज्यों में समीकरण बदलेंगे…
  हरियाणा-पंजाब में राजनीतिक समीकरण बदलेंगे
– पंजाब यूनिवर्सिटी में शहीद भगत सिंह चेयर के प्रोफेसर रौनकीराम कहते हैं- ”गुरमीत सिंह राम रहीम पर फैसले के बाद हरियाणा और पंजाब में राजनीतिक समीकरण बदलेंगे। नए समीकरण क्या बनेंगे, यह कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा। फैसले की राजनीतिक दल किस तरह व्याख्या करते हैं, यह भी समीकरण तैयार करेगा।”
– ”यह सच है कि हरियाणा और पंजाब में तमाम राजनीतिक दल नेता डेरा प्रमुख से आशीर्वाद लेते रहे हैं। इसकी वजह से कई दलों की सरकारें भी बनी हैं। लेकिन डेरा प्रमुख के बरी होने या सजा होने की स्थिति में कोई भी राजनीतिक दल खुलकर श्रेय नहीं ले पाएगा। क्योंकि अगर डेरा प्रमुख को कोर्ट बरी करता है तो भाजपा या सरकार खुले तौर पर यह नहीं कह सकती कि उसने कोर्ट को मैनेज किया। क्योंकि हमारी न्यायपालिका स्वतंत्र है।”
– ”यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक स्थिति है। इससे अल्प समय के लिए तो फायदा उठाया जा सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह सोसायटी के लिए नुकसानदायक होगा। पर सरकारों की गलत पॉलिसियों की वजह से भी लोग डेरों और आश्रमों की ओर जाते हैं। डेरे-आश्रम उनके बच्चों की पढ़ाई, रोजगार, बेटियों की शादी आदि सामाजिक कार्यों में मदद करते हैं। अगर यही काम सरकारें ठीक से करने लगे तो लोगों का रुझान डेरों की ओर इतना नहीं होगा। रोचक बात यह है कि डेरा प्रमुख या संत कभी राजनीतिक दलों के पास नहीं जाते, बल्कि राजनेता उनके पास जाते हैं। ताकि वह अपने समर्थकों के उनके पक्ष में वोट करा दें।”
अगाध श्रद्धा के आगे विफल हो जाते हैं सभी तर्क
– पंजाब यूनिवर्सिटी में सोशलॉजी के प्रोफेसर मंजीत सिंह कहते हैं- ”दरअसल, अगाध श्रद्धा के आगे सभी तर्क फेल हो जाते हैं। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख संत राम-रहीम के मामले में भी कुछ ऐसा ही है। दरअसल, अनुयायी संत राम रहीम को अपना भगवान मानते हैं। वे यह मानने को तैयार ही नहीं है कि वह आपराधिक प्रवृत्ति वाले भी हो सकते हैं। इसकी वजह यह है कि ऐसे अनुयायियों में ज्यादातर लोग व्यवस्था या उच्च जातियों से प्रताड़ित शोषित होते हैं।”
– ”ऐसे लोग संत राम रहीम ही क्या? किसी के भी साथ लग सकते हैं। उन लोगों को अपने गुरु के लिए इस तरह के प्रदर्शनों या कार्यक्रमों में आकर आत्म संतुष्टि मिलती है। हमारा मानना है कि सिखिज्म, हिंदुज्म और आर्य समाज के फेल होने की वजह से ही डेरे या आश्रम आदि बनते और आगे बढ़ते हैं। अगर सिखिज्म और आर्य समाज प्रभावी होते तो जाति-पाति की व्यवस्था ही नहीं होती। फिर ये डेरे आश्रम भी नहीं पनपते। इन्हें राजनीतिक दल शह देते हैं, क्योंकि वे इनका चुनावी फायदा उठाते हैं।”
– ”राजनीतिक दलों ने सत्ता प्राप्ति के लिए डेरे का भरपूर फायदा उठाया है। हालांकि, डेरा प्रमुख संत राम-रहीम अपने बेटे को अपना उत्तराधिकारी बना चुके हैं। इसलिए अगर उन्हें सजा होती है तो उनका बेटा उत्तराधिकारी के रूप में डेरे की व्यवस्था को संभाल लेगा। लेकिन फैसले के बाद शांति बनाए रखना या कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने देना राजनीतिक दलों के हाथ में है। वही इसके जिम्मेदार होंगे। अब कौन राजनीतिक दल इसका कैसे फायदा उठाता है, कुछ नहीं कहा जा सकता।”
बाबा के खिलाफ और बचाव में ये थी दलीलें
# बाबा के बचाव में: (सीनियर वकील,लाल बहादुर खेवाल के मुताबिक)
– 1999 का मामला देरी से कोर्ट में फाइल हुआ। मामले में साइंटिफिक सबूतों को बरामद नहीं किया जा सका।
– पीड़ित लड़की ने जांच के दौरान एक बार बयान बदला। जांच इंस्पेक्टर ने गवाही में कहा कि पीड़िता ने रेप की बात नहीं की।
# बाबा के खिलाफ में:(सीनियर वकील,लाल बहादुर खेवाल के मुताबिक)
– आरोपी अतिप्रभावशाली है, जिसकी वजह से केस में देरी हुई। यह पूरी तरह से साबित हो। देरी की वजह आरोपी का प्रभावशाली होना साबित होने के बाद साइंटिफिक सबूतों का मिलना जरूरी नहीं।
– अगर आरोपी के अतिप्रभावशाली होने और दबाव पर बयान बदलने की बात साबित हो तो भी आरोपी पर कार्रवाई हो सकती है।
सेक्शुअल हैरेसमेंट केस की हिस्ट्री
– अप्रैल 2002 में साध्वी ने हाईकोर्ट और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लेटर भेजा था। इसके बाद डेरा चीफ से लेटर में लगाए आरोपों पर जानकारी हासिल करने के लिए सिरसा के सेशन जज को भेजा गया।
– सितंबर 2002 में हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई से कराने के ऑर्डर दिए। इसमें लिखा गया कि मामले में सेक्शुअल हैरेसमेंट से इनकार नहीं किया जा सकता।
– दिसंबर 2002 में चंडीगढ़ सीबीआई ब्रांच ने राम रहीम के खिलाफ धारा 376, 506 और 509 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की।
– दिसंबर 2003 से अक्टूबर 2004 तक डेरा चीफ की पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर स्टे लगा दिया। बाद में स्टे हटा सीबीआई को जांच मिली।
– 2005-2006 के बीच में कई इन्वेस्टिगेशन अफसर बदले। बाद में जांच अफसर सतीश डागर ने इन्वेस्टिगेशन की और उस साध्वी को ढूंढ़ा, जिसने रेप के आरोप लगाए थे।
– जुलाई 2007 में सीबीआई ने अंबाला सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट फाइल की। इसमें बताया गया कि डेरा में 1999 और 2001 में कुछ और साध्वियों से भी रेप हुआ। बाद में मामला पंचकूला कोर्ट में शिफ्ट हुआ।
– अगस्त 2008 में ट्रायल शुरू हुआ और डेरा चीफ के खिलाफ आरोप तय किए गए। 2009-2010 में दो पीड़ित सामने आए, जिन्होंने कोर्ट में बयान दिए। सीबीआई के सामने दिए पीड़ित के बयान की हैंडराइटिंग के सैंपल को लेकर भी कई सवाल उठे थे।
– जुलाई 2016 को केस के दौरान 52 गवाह पेश हुए। इनमें 15 प्रोसिक्यूशन और 37 डिफेंस के थे।
– जून 2017 में डेरा सच्चा सौदा चीफ ने विदेश जाने के लिए कोर्ट में अपील दायर की, जिसमें वह अपनी फिल्म का प्रोमोशन करना चाहते थे। कोर्ट ने उनके विदेश जाने पर रोक लगाई थी।
– 25 जुलाई 2017 को कोर्ट ने रोज सुनवाई करने के निर्देश दिए, ताकि केस जल्द निपट सके। 17 अगस्त को बहस खत्म हुई और फैसले के लिए 25 अगस्त का दिन तय दिन किया गया।
राम रहीम के 9 और विवाद
– बच्चे की मौत को लेकर पत्रकारों से विवाद।
– कुरुक्षेत्र के रणजीत सिंह की हत्या का आरोप।
– पत्रकार छत्रपति पर हमला कर हत्या का आरोप।
– गुरु गोबिंद सिंह जैसी वेशभूषा को लेकर विवाद।
– प्रदर्शन कर रहे सिखों पर गोली चलाने का आरोप।
– पाबंदी के बावजूद नामचर्चा और फायरिंग के आरोप।
– डेरा के पूर्व मैनेजर की गुमशुदगी को लेकर आरोप।
– दिसंबर 2012 में गुरुद्वारे पर धावा बोलने का आरोप।
– डेरे के साधुओं को नपुंसक बनाने का आरोप।

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