7 अक्टूबर 1917 का दिन रूसी क्रान्ति में विशेष, जिसने इतिहास में किसे कुछ विशेष बदलाव…

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1917 की रूसी क्रांति  फरवरी क्रांति और अक्टूबर क्रांति- में हुई। फरवरी क्रांति ने से जहां रूस में जार के शासन का अंत हुआ वहीं बोल्शेविक के नेतृत्व में अक्टूबर क्रांति से दुनिया में पहले मार्क्सवादी राज्य की स्थापना हुई जिसका नेतृत्व व्लादिमिर लेनिन ने किया।

रूस में किसानों की स्थिति बहुत दयनीय थी। धनी जमींदार उनका शोषण करते थे। काम किए बगैर जमींदार बड़ा मुनाफा लेते थे। हालांकि रूस औद्योगीकरण के मामले में यूरोप से पीछे नहीं था लेकिन वहां काम करने वाले लोगों की स्थिति बहुत खराब थी। उनको लंबे समय तक काम करना पड़ता था और मजदूरी बहुत कम मिलती थी। इससे लोगों के बीच अंसतोष था।

20वीं सदी के पहले दशक में रूस के लोग जार निकोलस द्वितीय के निरंकुश शासन से काफी निराश और गुस्से में थे। 22 जनवरी, 1905 को रविवार के दिन निहत्थे प्रदर्शनकारियों का एक दल निकोलस द्वितीय को याचिका देने के लिए सेंटर पीटर्सबर्ग स्थित विंटर पैलेस की ओर बढ़ा। प्रदर्शनकारी रूस में वर्किंग क्लास की समस्याओं जैसे मजदूरी, काम के घंटे और काम की स्थिति से निकोलस को अवगत कराना चाहते थे। उनलोगों की बात सुनने की बजाए जार के सैनिकों ने निहत्थे लोगों पर अंधाधुंध गोली चला दी जिसमें बड़े पैमाने पर लोग हताहत हुए। इस कारण इसे खूनी रविवार के नाम से भी जाना जाता है। इस घटना के बाद रूस के लोगों में जार को लोग असंतोष और गुस्सा बढ़ता चला गया जिसने क्रांति की जमीन तैयार की।

निकोलस द्वितीय ने 1905 की क्रांति के बाद संवैधानिक सुधारों का आदेश दिया और पहली बार अपने निरंकुश शासन में संसद को साझीदार बनाने के लिए सहमति जताई। लेकिन बाद में उन्होंने पहले दो संसदों को उस समय खारिज कर दिया जब उनको सहयोगी नहीं पाया। इसके अलावा तैयारी नहीं होने के बावजूद पहले विश्व युद्ध में रूस को घसीटने और बड़े नुकसान होने के बाद लोग निकोलस द्वितीय को ही इसका जिम्मेदार मानने लगे और जार के शासन पर लोगों का गुस्सा क्रांति के रूप में फूटा।

प्रथम विश्व युद्ध के कारण रूस की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति काफी खराब हो गई। युद्ध में हुई बड़ी क्षति विद्रोह की वजह बनी। सैनिकों को भूखा रहना पड़ा, रसद की सप्लाई रुक गई और दयनीय स्थिति हो गई। रूस में खाद्य की कमी ने विकराल संकट का रूप धारण कर लिया। युद्ध के लिए सरकार ने लाखों रुबेल नोट्स छापे जिससे 1917 में चीजों की कीमतें कई गुना बढ़ गईं। इस सबसे भी लोगों में असंतोष बढ़ा और बगावत की ओर उनके कदम बढ़ते चले गए। इस तरह पहले विश्व युद्ध ने भी रूसी क्रांति में अहम भूमिका निभाई।

जार के निरंकुश शासन और भ्रष्टाचार को लेकर उपजे असंतोष के कारण पहली रूसी क्रांति फरवरी 1917 में हुई। पहला सबसे बड़ा आंदोलन 22 फरवरी, 1917 को हुआ जब पेट्रग्रैर्ड स्थित सबसे बड़े औद्योगिक संयंत्र के कामगारों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन की घोषणा की।

26 फरवरी को निकोलस द्वितीय ने बगावत पर उतर आए लोगों के दमन का सेना को आदेश दिया। 27 फरवरी को 60,000 सैनिक क्रांति में शामिल हो गए और रूस की राजधानी पर क्रांतिकारियों का कब्जा हो गया। 2 मार्च को निकोलस द्वितीय को पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। इससे रूस में जार के निरंकुश शासन का अंत हो गया
3 मार्च को जार निकोलस द्वितीय के शासन के अंत के बाद रूस की संसद ने प्रविजनल सरकार को नियुक्त किया। चार दिनों पहले पेट्रग्रैड सोवियत का गठन हुआ जो शहर के कामगारों और सैनिकों का प्रतिनिधित्व करता था। फरवरी क्रांति के बाद मार्च से अक्टूबर के बीच का समय सत्ता को लेकर पेट्रग्रैड सोवियत और प्रविजनल गवर्नमेंट के बीच खींचातानी का दौरा रहा हालांकि बाद में पेट्रग्रैड सोवियत की सत्ता पर पकड़ मजबूत हो गई। पेट्रग्रैड सोवियत ने सेना को निर्देश दिया कि संसद के मिलिट्री कमिशन के सिर्फ उन आदेशों का पालन करे जिनका सोवियत पेट्रग्रैड के आदेशों से टकराव न हो। प्रविजनल गवर्नमेंट सोवियत के इस आदेश को खारिज करने की साहस नहीं जुटा सकी। यानी एक तरह से सत्ता पर सोवियत पेट्रग्रैड हावी हो गए।

1917 में दूसरी रूसी क्रांति यानी अक्टूबर क्रांति का नेतृत्व व्लादिमिर लेनिन ने किया जिनकी लेखनी कार्ल मार्क्स के विचारों से प्रभावित थी। फरवरी क्रांति के मुकाबले अक्टूबर क्रांति योजनाबद्ध तरीके से कई गई। 24-25 अक्टूबर (6-7 नवंबर) को लेनिन के नेतृत्व में वामपंथी क्रांतिकारियों ने प्रविजनल गवर्नमेंट के खिलाफ आंदोलन कर दिया। बोल्शेविक ने सरकारी भवनो, टेलिग्राफ स्टेशनों और अन्य अहम स्थानों पर कब्जा कर लिया। शीघ्र ही नई सरकार का गठन हुआ जिसका नेतृत्व लेनिन ने किया।
इस क्रांति के बाद दुनिया में पहले मार्क्सवादी शासन की स्थापना हुई। जुलाई 1918 में बोल्शेविक ने जार निकोलस द्वितीय को उसकी पत्नी और पांच बच्चे के साथ फांसी दे दी। क्रांति के बाद रूस में सिविल वॉर एक बड़ी समस्या बनकर उभरी। सिविल वॉर वहां की रेड आर्मी और वाइट आर्मी के बीच था। रेड आर्मी बोल्शेविक तर्ज के समाजवाद के लिए लड़ रही थी जबकि वाइट आर्मी समाजवाद के विकल्प के रूप में पूंजीवाद, राजशाही के लिए लड़ रही थी। 1920 में बोल्शेविक विरोधियों को हरा दिया गया और 1922 में यूनियन ऑफ सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक्स (यूएसएसआर) की स्थापना हुई।

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