2 केस में बरी हुए कथित संत रामपाल, उनके वकील ने कहा- ये सच की जीत

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सतलोक आश्रम के संचालक और कथित संत रामपाल को हिसार कोर्ट ने दो मामलों में बरी कर दिया है।

हिसार. सतलोक आश्रम के संचालक और कथित संत रामपाल को हिसार कोर्ट ने दो मामलों में बरी कर दिया है। न्यूज एजेंसी से बातचीत में उनके वकील एपी. सिंह ने कहा कि ये सच्चाई की जीत है। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इन दो केस में बरी होने के बाद भी रामपाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। क्योंकि, उन पर देशद्रोह समेत कुछ और केस भी हैं। इनकी सुनवाई जारी है। लिहाजा, वो जेल में ही रहेंगे। बरवाला के सतलोक आश्रम से जुड़े इन मामलों में सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने और रास्ता रोककर बंधक बनाने के आरोप हैं। 2014 में रामपाल पर अभियोग नंबर 426 और 427 दर्ज किए गए थे। पुलिस ने समर्थकों से निपटने की कर रखी है तैयारी..
मंगलवार को हिसार कोर्ट में रामपाल से जुड़े केस में सुनवाई हुई। ये मामले धारा 426 और 427 के तहत दर्ज किए गए थे।
– कोर्ट ने इन दोनों आरोपों में रामपाल को बरी कर दिया। लेकिन, इस कथित संत के जेल से बाहर आने की फिलहाल कोई वजह नहीं है।
– रामपाल पर देशद्रोह जैसा बड़ा और संगीन केस चल रहा है। लिहाजा, वो जेल में ही रहेंगे। इस मुकदमे में 28 अगस्त को जेल में लगी अदालत में वह पेश हुआ था।
कौन है रामपाल?
– सोनीपत के धनाणा गांव में 1951 को जन्मे रामपाल हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर थे।
– इसके बाद नौकरी छोड़कर रामपाल ने रोहतक के करोंथा गांव में सतलोक आश्रम बनाया। यहां विवाद हुआ तो उन्होंने हिसार के बरवाला में अपना आश्रम बना लिया।
– इसके बाद रोहतक अदालत में चल रहे करौंथा कांड मामले में रामपाल पेश नहीं हो रहा था। मामले को हाईकोर्ट भेज दिया गया। हाईकोर्ट में रामपाल पेश नहीं हुआ।
– सीएमओ से मेडिकल भेज दिया गया था। लगातार गैर हाजिर होने पर हाईकोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किए थे।
– 16 नवंबर 2014 को पुलिस और प्रशासन को पेश होने का भरोसा दिलाया, मगर फिर पेश होने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने 17 नंवबर 2014 को आश्रम को घेरकर कार्रवाई की थी। इस समय रामपाल के समर्थक आश्रम के अंदर थे।
– पुलिस बल के बावजूद संत रामपाल को इसलिए गिरफ्तार नहीं किया जा सका क्योंकि प्रशासन को डर था कि कहीं पिछले साल जैसी हिंसा फिर न भड़क उठे। तब संत रामपाल के अनुयायियों और आर्य समाजियों के बीच हिंसा में पुलिस जवानों समेत 120 लोग घायल हुए थे, जबकि एक शख्स की मौत हो गई थी। इस मामले में उन पर देशद्रोह का मामला चल रहा है।

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