अगर 1857 में मिलती कामयाबी तो शायद स्वतन्त्रता दिवस की तारीख होती कुछ ओर……………

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जिन्होने देश के लिए कुर्बानियां दी वो तो कहीं इतिहास के पन्नों में गुम हो गये स्वतन्त्रता संग्राम के ऐसे क्रान्तिकारी वीर जिन्होने देश को आजादी के लिए लडने का एहसास पैदा किया था। 1857 की वो क्रान्ति जिसने पूरे देश में स्वतन्त्रता के लिए एक नवजागरण की आज लगा दी। जिसमें देश के नौजवान जिन्होने अभी बचपन भी ठीक से पूरा किया भाी नही किया था और देश की स्वतन्त्रता की ज्वाला में कूद पडें। हमारे देश के क्रान्तिकारी वीरों का बलिदान ही आज हमें सिर उठाने की आजादी देता हैं और हम उन्हें भूलते जा रहे हैं। सत सत नमन हैं हमें ऐसे वीरों का। आजीवन कर्जदार रहेंगा उनकी कुर्बानियों का ये देश।
देश की आजादी के आन्दोन के लिए कुछ महान महिलायें जिन्होंने अपना योगदान दिया हैं

रानी ईश्वरी कुमारी, रानी तेजबाई, रानी द्रोपदी बाई, चौहान रानी, वीरांगना झलकारी देवी, पराक्रमी मुन्दर अवंतिका बाई लोधी, महारानी तपस्विनी, ऊदा देवी,  बालिका मैना, तोपख़ाने की कमांडर जूही, रानी हिंडोरिया, नर्तकी अजीजन  जैसी महिलओं ने देश की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
   १८५७ की क्रांति मुख्य सूत्रधार और जनक थे मराठा ब्राह्मण नानासाहब पेशवा…लेकिन क्या इतिहास ने उनके साथ न्याय किया  देखते ही देखते शस्त्र विहीन भारत, शास्त्र विहीन भी हो गया | सांस्कृतिक जीवन मूल्यों के क्षरण व पश्चिमी अप संस्कृति के प्रचार प्रसार ने जगद्गुरू कहलाने वाले भारत को गर्त में धकेल दिया | हजारों वर्षो तक चैतन्य रहा समाज पुर्णतः आत्मविश्वास शून्य हो जड़ता को प्राप्त हो गया | कहने को आज भारत स्वाधीन है, किन्तु रीति नीति वही अंग्रेजों के शासनकाल की चली आ रही है |

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