रावण के नहीं थे दस सिर, फिर भी इसलिए कहलाया दशासन

0
350
views

बुराई पर अच्छाई के जीत का प्रतीक दशहरा भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। लंका के अधिपति रावण पर श्री रामचन्द्र के विजय के उपलक्ष्य में यह त्योहार मनाया जाता है। हम यहां आपको बताएंगे रावण का खास बातें –

ब्रह्मा का पड़पोता

पुराणों के अनुसार रावण प्रसिद्ध ऋषि विश्रवा का पुत्र था और ऋषि विश्रवा ब्रह्मा के मानस पुत्र पुलत्स्य की संतान थे। इस लिहाज से रावण, ब्रह्मा का पड़पोता हुआ।

लंका का सबसे समृद्ध राजा

जैसे कि रावण के बारें में लोगों का यह विश्वास है कि वह बहुत निर्दयी था लेकिन यह संपूर्ण सत्य नहीं है। रावण ने लंका को अपने भाई कुबेर से बलपूर्वक जीता था। इसके बाद वह लंका का सबसे प्रसिद्ध राजा बना।

भारत और श्रीलंका के कई स्थानों पर पूजा

दशहरा में रावण के पुतले का दहन बुराई पर अच्छाई के विजय के स्वरूप किया जाता है लेकिन भारत तथा श्रीलंका में कई स्थान एेसे भी हैं जहां रावण की पूजा की जाती है।

आंध्र प्रदेश के काकीनाड़ा में रावण द्वारा स्थापित विशाल शिवलिंग की पूजा उसके पूजा के साथ ही की जाती है।इसके अलावा भी कई एेसे स्थान हैं जहां रावण को पूजा जाता है।

रावण के दस सिर नहीं थे

रामायण के कुछ संस्करणों में रावण के दस सिर के नहीं होने की बात सामने आती है। रावण अपने पिता द्वारा बनाए गए एक हार (माला) को पहना करता था जिसके प्रकाश में प्रतिबिंबित होने से यह आभास होता था कि रावण के दस सिर हैं।

अद्वितीय वीणावादक

लंकापति रावण संगीत में अत्याधिक रुचि रखता था। उसे वीणा वादन के क्षेत्र में महारथ भी प्राप्त थी। रावण के ज्ञान की प्रशंसा स्वयं भगवान राम तक करते थे। इसलिए उनके आदेश पर लक्ष्मण ने मृत्यु शैय्या पर पड़े रावण के पास जाकर कुटनीति तथा राज्य के परिचालन संबंधी ज्ञान लेने को कहा।

भगवान शिव का परम भक्त

रावण भगवान शिव का परम भक्त था। उसने तपस्या कर भगवान शिव के आत्मलिंग को प्राप्त कर उसे लंका में स्थापित करने की कोशिश की परंतु अन्य देवताओं के षडयंत्र के कारण वह इस अभियान में सफल न हो सका।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here