राजपूत करणी सेना ने पदमावती फिल्म के विरोध में जलाए पोस्टर….

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मुंबई।   राजपूतों  को ‘पद्मावती’ का पोस्टर बिल्कुल पसंद नहीं आया, और ना इस भंसाली पर इस फिल्म को लेकर भरोसा किया जा रहा हैं । देश के 13 राज्यों से राजपूत समाज ने पदमावती फिल्म पर आपत्ति जताई हैं और इस फिल्म को लेकर सारे राजपूत एक हो गये हैं। राजपूत समाज पदमावती के चरित्र को बिगाडने को लेकर कडे विरोध में हैं।  बल्कि इन्होंने तो पोस्टरों को आग के हवाले कर किया।

सेना के एक ग्रुप ने राजमंदिर सिनेमा हाल के बाहर भंसाली के खिलाफ नारेबाजी की और पोस्टर जलाए। सेना के जयपुर जिलाध्यक्ष नारायण सिंह दिवराला ने कहा, ‘जयपुर में शूटिंग के दौरान भंसाली ने उन लोगों से वादा किया था कि रिलीज से पहले राजपूतों और इतिहासकारों को वो फिल्म दिखाएंगे, लेकिन उसके बाद किसी ने हमसे संपर्क नहीं किया और ना ही फिल्म दिखाई।’

पोस्टरों से इस हद तक नफरत करने वाले ये हैं श्री राजपूत करणी सेना के लोग, जो फिल्म की शूटिंग के वक्त से ही विरोध कर रहे हैं। शनिवार को सेना ने जयपुर में फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन किया।

सेना के एक ग्रुप ने राजमंदिर सिनेमा हाल के बाहर भंसाली के खिलाफ नारेबाजी की और पोस्टर जलाए। सेना के जयपुर जिलाध्यक्ष नारायण सिंह दिवराला ने कहा, ‘जयपुर में शूटिंग के दौरान भंसाली ने उन लोगों से वादा किया था कि रिलीज से पहले राजपूतों और इतिहासकारों को वो फिल्म दिखाएंगे, लेकिन उसके बाद किसी ने हमसे संपर्क नहीं किया और ना ही फिल्म दिखाई।’

 

दिवराला ने कहा कि श्री राजपूत करणी सेना की कोर कमेटी और दूसरी संस्थाओं समेत इतिहासकारों को फिल्म दिखाने की हम मांग कर रहे हैं। तब तक हम फिल्म को रिलीज नहीं होने देंगे। अगर करणी सेना और इतिहासकारों को कोई आपत्ति नहीं होती है, तभी हम फिल्म को रिलीज होने देंगे। मीडिया के जरिये हमें पता चला है कि फिल्म में इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा गया है, जो अस्वीकार्य है।

इसी साल जनवरी में जयपुर में फिल्म की शूटिंग के दौरान अपने इतिहास की रक्षा के लिए राजपूत करणी सेना ने भंसाली को थप्प्ड मारकर उसे सबक सीखाया था करणी सेना के सदस्यों ने भंसाली के साथ हाथापाई की थी और सेट पर तोड़-फोड़ मचाई थी। करणी सेना का दावा था कि उनके पास बहुत बड़ी लाइब्रेरी है। किताबों में कहीं नहीं लिखा कि अलाउद्दीन खिलजी पद्मावती का प्रेमी था।

मार्च में करणी सेना के कुछ सदस्यों ने चित्तौड़गढ़ किले में स्थित पद्मिनी महल में लगे उस शीशे को भी तोड़ दिया था, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसी में अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मावती के रूप के दर्शन किए थे। सेना का दावा है कि पद्मावती जिस कालखंड से आती हैं, उसके कई सालों बाद शीशे की खोज हुई थी।

 

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