ये हैं रियल लाइफ के’बंटी-बबली’ नौकरी का लेटर देकर ऐसे करते हैं ठगी, हो जाएं अलर्ट….

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 चपरासी से लेकर अकाउंटेंट तक की नौकरी के बदले में 4 लाख रुपए तक की राशि मांगी गई। भरोसा दिलाने के लिए बीती जुलाई में ज्वाइनिंग के आदेश भी दिए गए। इसके बाद हाल ही में वेतन भुगतान कराने की अनुमति के आदेश भी भेज दिए गए। बेरोजगारों ने ये आदेश नगर निगम के एस्टेब्लिशमेंट सेक्शन में जमा भी करा दिया। शहर के करीब 70 बेरोजगारों को अचानक एक युवक और युवती ने नगर निगम में बढ़िया नौकरी का ऑफर दिया।

खुलासे के बाद तो मास्टर माइंड रवि त्रिपाठी सभी उम्मीदवारों को कमिश्नर के फर्जी सील-साइन किए नियुक्ति पत्र सौंपकर गायब हो गया। इससे पहले रवि ने इन्हें जॉब कन्फर्मेशन के लेटर भी भेज दिए थे। ग्वालियर नगर निगम में नौकरी लगाने के नाम पर लगभग 70 बेरोजगारों से लाखों रुपए ठगने वाले ‘बंटी-बबली’ का खुलासा हुआ है। बेरोजगारों के जमा कराए ये लेटर कई दिनों से अकाउंट एंड एस्टेब्लिशमेंट सेक्शन में घूम रहे थे।

बेरोजगारों का आरोप है कि नगर निगम अफसरों ने इस मामले को सीरियसली नहीं लिया, इसलिए मास्टरमाइंड रवि को सुरक्षित फरार होने का मौका मिल गया। पीड़ितों के अनुसार रवि त्रिपाठी की सहयोगी की भूमिका निभाने वाली संजना दुलानी उन्हें शिकायत करने पर सबक सिखाने की धमकी भी दी है। खुद को एक रिटायर्ड अफसर की साली बताने वाली संजना की FB वॉल पर कार्यक्रमों में BJP नेताओं के साथ की फोटो पोस्ट हैं। पीड़ित बेरोजगारों का कहना है कि इन्हीं फोटो का हवाला देकर संजना उन्हें मामला वापस लेने की धमकियां दे रही है।

अपने साले को भी ठगा
बेरोजगार देवेंद्र सेंगर के मुताबिक रवि उसका मुंहबोला बहनोई है उसने सभी पीड़ितों को बताया कि उसकी परिचित संजना दुलानी नगर निगम में रिक्रूटमेंट ऑफिसर है। देवेंद्र को रवि ने निगम के अकाउंट सेक्शन में क्लर्क या फील्ड ऑफिसर की नौकरी का झांसा दिया था।पिंकी को भी प्यून बनवाकर घर के किसी पास के वार्ड में पोस्टिंग करा देंगे। बेरोजगारी से परेशान देवेंद्र ने स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत अपने भाई से लोन के जरिए 2लाख रुपए का इंतजाम किया और बाकी रकम पत्नी के जेवर बेच कर जुटाई।इन सभी को रवि ने पहले रिक्रूटमेंट ऑफिसर बताकर संजना से मिलवाया। बाद में संजना ने ही इन सभी का इंटरव्यू भी लिया, और सभी को अपॉइंटमेंट लेटर भेज दिए गए। मामला खुला तो मास्टर माइंड रवि फरार हो गया,

रवि की मुलाकात जितने लोगों से हुई, उनको उसने नाम तो एक ही बताया लेकिन सरनेम सबको अलग बताया। वह कभी रवि कुमार तो कभी रवि त्रिपाठी मिलकर लोगों से मिला। कुछ लोगों से वह रवि वाल्मीकि बना तो कुछ को अपना नाम रवि सबरवाल बताया।
रवि ने ठगी के मामले में अपने रिश्तेदार और दोस्‍तों को भी नहीं बख्शा। उसने दोस्त जितेंद्र के जरिये उसके दोस्त को शिकार बनाया। यहां तक कि अपने मुंहबोले साले देवेंद्र और उसकी पत्नी पिंकी से पैसे ऐंठने के बाद देवेंद्र के तीन-चार दोस्तों को भी उसके ही जरिए फांस लिया।
  मास्टरमाइंड से थे पारिवारिक संबंध 
पीड़ितों के मुताबिक रवि के लापता हो जाने के बाद उन्होंने उसकी सहयोगी संजना को तलाशा और उससे मुलाकात की तो उसने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि रवि से पारिवारिक संबंध हैं, लेकिन उसके कामकाज से उसका कोई लेनादेना नहीं है।

संजना ने कहा कि वे शनिवार को अपना पक्ष रखने एसपी ऑफिस गई थीं, लेकिन एसपी से मुलाकात नहीं हो पाई पीड़ितों ने बताया कि संजना ने पहले तो अपने BJP के नेताओं से संबंधों का हवाला देकर शिकायत नहीं करने को धमकाया, और शिकायत पुलिस के पास पहुंच गई तो धमकी दी कि इस मामले में उनका नाम घसीटा गया तो वह SPऑफिस में जाकर आत्मदाह कर लेगी।

ये लोग बने इनके शिकार
1. नदी पार टाल मुरार के करतार ने 5 माह पहले प्यून के लिए 3 लाख रुपए रवि को दिए थे।
2. दीनदयाल नगर के सतीश मालवीय ने भी 5 माह पहले ही प्यून के लिए 2 लाख रुपए रवि को दिए थे।
3. कमलेश ने भी प्यून बनने के लिए खेत बेचकर 2 लाख रुपए रवि को दिए थे।
4. गोहद के सूरज सिंह ने प्यून बनने 3 माह पहले 3 लाख रुपए रवि को दिए थे।
5. डीडी नगर के इंद्रजीत वर्मा ने 6 माह पहले प्यून के लिए 2 लाख रुपए दिए थे। सुरेंद्रसिंह ने भी प्यून बनने के लिए 3 लाख रुपए दिए।
6. रेंहट के मंगल छात्रे ने भी प्यून पद के लिए 1 लाख रुपए का एडवांस दिया था। जबकि डीडी नगर के संजय कुमार ने भी प्यून बनने के लिए 1.30 लाख रुपए दिए थे इसी तरह भिंड में मेहगांव के बबलू ने प्यून पद के लिए 2 लाख रुपए दिए थे।
7. डीडी नगर के दीपक केशले ने सफाई कर्मी बनने के लिए 5 माह पहले 80 हजार रुपए दिए थे, इसी तरह विनय नगर की रबीना ने भी सफाई कर्मी बनने के लिए 80 हजार रुपए दिए।

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