मोदी सरकार को गुजरात चुनाव में GST ने खींचा मैदान में..

2
241
views

अमरीका में जीएसटी को लेकर सफलता के कितने भी दावे ठोक लें पर राजस्व सचिव हसमुख अधिया और   मोदी के गुजरात में दिए भाषण से लगता है कि जीएसटी को लेकर मोदी सरकार की सांस फूली हुई है।   इस दिवाली पर पिछले साल से काफी कम बिक्री हुई है। करों की अधिक दरों से सामान के महंगा होने पर खरीदारों ने दिवाली खरीद से हाथ खींच लिए।

राजस्व सचिव ने कहा कि अब लघु और मझोले उद्योगों के बोझ को कम करने के लिए कर ढांचे में बड़े बदलाव की जरूरत है। अधिया ने कहा कि इस बदलाव के लिए फिटमेंट कमेटी को गणना करने की जरूरत होगी। यह समिति विचार करेगी कि किस वस्तु की कर दर को तर्कसंगत बनाने की जरूरत है। हम यह काम जल्द से जल्द करना चाहते हैं।

दीवाली में व्यापरियों को हुआ व्यापार में नुकसान
विगत 10 वर्षों में इस बार दिवाली सबसे फीकी रही। इस व्यापारी महासंगठन के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा है कि नोटबंदी और जीएसटी के लागू होने के बाद से बााजर में अनिश्चितता का माहौल है और नकदी की भारी कमी है।अखिल भारतीय व्यापार महासंगठन के अनुसार पिछले साल के मुकाबले इस साल दिवाली पर 40 प्रतिशत कम बिक्री हुई है। व्यापारियों का कहना है कि बाजार में घोर मंदी का माहौल रहा।  28 प्रतिशत जीेसटी स्लैब का खासा असर खरीदारी पर पड़ा है।
जीएसी को बताया  भारत का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार
जीएसी को आजाद भारत का सबसे बड़ा आॢथक सुधार बताया गया। इसका पूरा श्रेय लेने के लिए मोदी सरकार ने मध्य रात्रि में संसद का विशेष सत्र बुलाया था, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने इसका श्रेय लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी, जीएसटी में जिस तरह आंख मूंद कर वस्तु एवं सेवाओं के ऊपर कर लगाया गया है, उससे अब खुद सरकार हिली हुई है। एसी रेज पर 28 फीसदी से कम कर 18 फीसदी करने का संकेत सरकार खुद दे चुकी है। लेकिन अब प्रधानमंत्री यह कह रहे हैं कि यह निर्णय उनके अकेले का नहीं था, कांग्रेस भी बराबर की हिस्सेदार थी।

मोदी सरकार ने फेर दिया संभावित फायदों पर पानी 
28 फीसदी के स्लैब में आने वाली वस्तुओं की फेहरिस्त को भी कम करने का संकेत राजस्व सचवि हसमुख अधिया कुछ दिन पहले हीं स्वयं दे चुके हैं। यह सरकारी धींगा मस्ती का नतीजा है कि महज चार महीनों में 100 से अधिक वस्तुओं पर जीएसटी की दरों में फेरबदल सरकार को करना पड़ा है। बिना तैयारी और परीक्षण के मोदी सरकार ने इस ऐतिहसिक कर सुधार की संभावित फायदों पर पानी फेर दिया है।