मोदी ने म्यांमार में चरमपंथी हिंसा को लेकर चिंता जताई….

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नरेंद्र मोदी ने बुधवार को म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की से औपचारिक मुलाकात की।

.नरेंद्र मोदी ने बुधवार को म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की से औपचारिक मुलाकात की। मोदी की सू के साथ यह पहली बाइलेटरल मीटिंग थी। बाद में ज्वाइंट स्टेटमेंट में मोदी ने रोहिंग्या मुसलमान का सीधे नाम तो नहीं लिया, लेकिन कहा कि हम यहां के रखाइन राज्य में चरमपंथी हिंसा को लेकर चिंतित हैं। जिन चुनौतियों का आप मुकाबला कर रहे हैं, उन्हें हम समझते हैं। लोगों पर इसका असर पड़ना लाजिमी है। सभी स्टेक होल्डर्स मिलकर इसका हल निकालेंगे। मुझे लगता है कि सभी के लिए शांति, न्याय और लोकतांत्रित व्यवस्था कायम रहेगी।” और क्या कहा मोदी ने…
– नरेंद्र मोदी ने कहा- “पड़ोसी होने के नाते हमारे हित एक ही हैं। सड़कों और पुलों का निर्माण हमारे अच्छे भविष्य की ओर संकेत करते हैं। भारत से म्यांमार के लिए हाईस्पीड डीजल ट्रकों का आना शुरू हो गया है। हम म्यांमार की हेल्थ के क्षेत्र में भी मदद कर रहे हैं। भविष्य में हमारे प्रोजेक्ट्स म्यांमार की जरूरतों के अनुरूप ही होंगे। आज हुए समझौतों से हमारे रिश्तों को बल मिलेगा।”
– “म्यांमार के जो लोग भारत आना चाहते हैं, उन्हें ग्रेटिस वीजा दिया जाएगा।”
– “भारत की जेलों में बंद हमने म्यांमार के 40 लोगों को रिहा करने का फैसला किया है। वे जल्द ही अपने परिवार से मिल पाएंगे।”
मोदी ने किया था ट्वीट
– मोदी ने म्यांमार पहुंचने के बाद ट्वीट किया, “अभी ने पी तॉ पहुंचा, मेरी म्यांमार यात्रा यहीं से शुरू होगी। म्यांमार की यात्रा के दौरान मैं कई कार्यक्रमों में शामिल होऊंगा।” बता दें कि मोदी अपनी दो देशों की यात्रा के दूसरे फेज में म्यांमार पहुंचे हैं।
– मोदी ने म्यांमार के प्रेसिडेंट से मुलाकात के दौरान उन्हें कई तोहफे भी दिए, जिसमें बोद्धिवृक्ष भी शामिल है।
भारत-चीन के लिए अहम है म्यांमार
– म्‍यांमार को भारत के लिए साउथ-ईस्ट एशिया का एंट्री गेट माना जाता है।
– चीन के लिए भी यह रणनीतिक अहमियत रखता है, ऐसे में भारत ही नहीं, बल्कि चीन भी यहां अपना दायरा बढ़ाने में जुटा हुआ है। म्‍यांमार चीन के वन बेल्‍ट-वन रोड (OBOR) प्रोजेक्ट का एक अहम हिस्सा है। लिहाजा भारत-चीन दोनों चाहेंगे कि म्‍यांमार उनके साथ खड़ा हो।
रोहिंग्या मुस्लिमों का मुद्दा भी गरम
– म्यांमार में लगातार रोहिंग्या मुस्लिमों पर हो रहे टॉर्चर ने दुनिया का ध्यान खींचा है। भारत समेत यूएन भी इस मामले पर अपनी नजर बनाए हुए हैं।
– आंकड़ों के मुताबिक, अब तक करीब 400 रोहिंग्या मुस्लिम की हत्या हो चुकी है। जान बचाने के लिए पहाड़ों और नदियों के रास्ते म्यांमार को पार कर बांग्लादेश और भारत की ओर आ रहे हैं।
– भारत सरकार ने कहा कि रोहिंग्या मुस्लिम अवैध प्रवासी हैं और इसलिए कानून के मुताबिक उन्हें बाहर किया जाना चाहिए। गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने इस मसले पर कहा, “कोई भी भारत को ह्यूमन राइट्स और शरणार्थियों की सुरक्षा के बारे में नहीं सिखा सकता है।” बता दें कि भारत से रोहिंग्या लोगों को बाहर किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की गई है और इसे संविधान के दिए अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है।
क्या है मामला?
– 25 अगस्त को रोहिंग्या घुसपैठियों ने म्यांमार में पुलिस पोस्ट पर हमला किया। इसके बाद सिक्युरिटी फोर्सेस ने ऑपरेशन शुरू किया। रोहिंग्या घुसपैठियों और म्यांमार की सिक्युरिटी फोर्सेस एक-दूसरे पर अत्याचार करने का आरोप लगा रहे हैं। बर्मा ह्यूमन राइट नेटवर्क का कहना है कि इस अत्याचार के पीछे सरकार, देश के बुद्धिस्थ मोंक में शामिल तत्व और अल्ट्रा नेशनलिस्ट सिविलियन ग्रुप्स का हाथ है।
मसले से भारत क्यों जुड़ा?
– म्यांमार से आए रोहिंग्या मुस्लिम दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर शरण देने की मांग कर रहे हैं। वहीं, सरकार ने देश में अवैध रूप से मौजूद 40 हजार से अधिक रोहिंग्या लोगों को वापस उनके देश म्यांमार भेजने की प्रॉसेस शुरू की है। इसी बीच, मोदी म्यांमार दौरे पर पहुंच चुके हैं। म्यांमार की आर्मी की कथित ज्यादतियों के चलते रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत और बांग्लादेश जैसे देशों में शरण लेनी पड़ी। रोहिंग्या जम्मू, हैदराबाद, हरियाणा, यूपी, दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं।
– सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्या शरणार्थियों की तरफ से दायर एक पिटीशन में मो. सलीमुल्लाह और मो. शाकिर ने कहा कि रोहिंग्या मुस्लिमों का प्रस्तावित निष्कासन संविधान आर्टिकल 14(समानता का अधिकार) और आर्टिकल 21 (जीवन और निजी स्वतंत्रता का अधिकार) के खिलाफ है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 11 सितंबर को होनी है।
कौन हैं रोहिंग्या?
– इतिहासकारों के मुताबिक, रोहिंग्या म्यांमार में 12वीं सदी से रहते आ रहे मुस्लिम हैं।
– अराकान रोहिंग्या नेशनल ऑर्गनाइजेशन ने कहा, “रोहिंग्या हमेशा से ही अराकान में रहते आए हैं।
– ह्यूमन राइट वाच के मुताबिक, 1824-1948 तक ब्रिटिश रूल के दौरान भारत और बांग्लादेश से प्रवासी मजदूर म्यांमार में गए, क्योंकि ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेटर्स के मुताबिक म्यांमार भारत का हिस्सा था इसलिए ये प्रवासी देश के ही माने जाएंगे।

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