मानहानि मामले में कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा को 2 साल की सजा

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भोपाल  मानहानि के मामले में भोपाल के अपर सत्र न्यायाधीश काशीनाथ सिंह ने शुक्रवार को फैसला सुनाया।जिला अदालत ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा को दो साल की सजा सुनाई और 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। मिश्रा ने शिवराज व उनकी पत्नी साधना सिंह पर व्यापम (वर्तमान में प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड) घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया था। इस मामले में मानहानि का केस चल रहा था। फैसले के 10 मिनट बाद ही मिश्रा को जमानत भी मिल गई। भोजनावकाश के बाद जैसे ही न्यायाधीश अदालत में पहुंचे, उन्होंने मिश्रा को दोषी करार दे दिया। इसके पांच मिनट बाद उन्होंने सजा सुनाई। फैसले के बाद मिश्रा ने मीडिया से कहा कि ‘मैं फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दूंगा, ऐसे फैसले भ्रष्टाचार के खिलाफ मेरी आवाज पर ताला नहीं लगा पाएंगे, मैं अपने आरोपों पर कायम हूं।’

इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री के वकील व मामले में विशेष लोक अभियोजक रहे जगदीश दुबे ने कहा कि 110 पेज के फैसले में न्यायाधीश ने गीता, कुरान व उपनिषद का जिक्र करते हुए किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा का अर्थ समझाते हुए अपना फैसला सुनाया। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से दाखिल मानहानि संबंधी यह प्रदेश का पहला मुकदमा है। इस फैसले के बाद राजनीतिक पार्टियां और नेतागण किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति पर आरोप लगाने के पहले दस बार सोचेंगे।

व्यापम मामले को लेकर आरोप

केके मिश्रा ने 21 जून 2014 को मुख्यमंत्री पर व्यापम मामले को लेकर आरोप लगाया था। कहा गया था कि उनकी ससुराल गोंदिया के 19 परिवहन निरीक्षक भर्ती हुए। इस मामले में 24 नवंबर 14 को सरकार की अनुमति से लोक अभियोजक ने मुख्यमंत्री की मानहानि का मुकदमा दायर किया था। साथ ही मुख्यमंत्री निवास से किसी प्रभावशाली महिला द्वारा व्यापम के आरोपी नितिन महिन्द्रा आदि को 129 फोन कॉल किए गए। मिश्रा ने फूलसिंह चौहान, प्रेमसिंह चौहान, गणेश किरार और संजय सिंह चौहान पर भी आरोप लगाए थे।

 

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