भारत ने अटकायी चल के ग्लैंड फार्मा खरीदने का परपोसल………

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नई दिल्ली की कैबिनेट कमेटी आॅन इकोनाॅमिक अफेयर्स ने कंपनी शंघाई फोसुन के भारतीय कंपनी ग्लैंड फार्मा की मेजॉरिटी स्टेक खरीदने के लिए 8800 करोड़ रुपए के प्रपोजल में आपत्ति लगा दी हैं। कम्पनी का यह प्रस्ताव चीन और भारत के बीच असहमति का बडा कारण दोनो देश के बाॅर्डर पर हालात खराब होना समझा जा रहा हैं। सीसीईए ने प्रपोजल को नहीं दी मंजूरी सूत्रों ने कहा कि बीते महीने हुई सीसीईए की मीटिंग में इस प्रपोजल को मंजूरी नहीं दी गई। मंजूरी नहीं देने के पीछे खुले तौर पर यह वजह बताई गई कि हैदराबाद की ग्लैंड फार्मा के पास मॉडर्न इंजेक्टेबल टेक्नोलॉजी है, जो इस डील के चलते विदेशी हाथों में चली जाएगी। एक अन्य सूत्र ने कहा कि सीसीईए ने वास्तविक वजह बताए बिना डील पर कई आपत्तियां लगा दीं।

8800 करोड़ का था प्रपोजल इस प्रपोजल को इंटर मिनिस्ट्रियल बॉडी फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) ने अप्रैल में मंजूरी दी थी। बोर्ड ने सीसीईए को ग्लैंड फार्मा के 8800 करोड़ रुपए के फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रपोजल को मंजूरी देने की सिफारिश भेजी थी। चीनी कंपनी ने अपनी सब्सिडियरी कंपनियों फोसुन फार्मा इंडस्ट्रियल लि., फोसुन इंडस्ट्रियल कंपनी लि., एंपिल अप लिण्ए लस्टरस लि. और रीगल गेस्चर लि. के माध्यम से ग्लैंड फार्मा की स्टेक खरीदने का प्रपोजल रखा था। यदि चीन को यह प्रपोसल मिलता तो चीन 100 फीसदी स्टोक खरीद सकता था। इससे फोसुन को ग्लैंड फार्मा के अन्य स्टेकहोल्डर्स से एक या कई किस्तों में कंपनी की 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के कंट्रैक्चुअल राइट खरीदने के अधिकार मिल जाएंगे। एफआईपीबी को 5 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के प्रपोजल्स को मंजूरी देने के लिए सीसीईए के अप्रूवल की जरूरत होती है।

 

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