बरसी बूंदे रिमझिम रिमझिम और खिलखिलाता मन मोर भी रूक गया जब मनमस्त होकर नाचे हम…………………

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बारिस का नाम सुनते ही मन में एक खूबसूरत सी अभिलाषा आने लगती हैं जैसे जैसे बारिस की बूंदो की रफ्तार बढने लगती हैं तो दिल को खुशियों के उपहार मिलने लगते हेैं। जैसे खुशियों बाग ने बस हमें ही बुलाया। झूमने लगता हैं मन का आंगन और भर जाता हैं स्फूर्ति से मेरा मन क्यूकिं संग हैं मेरे बारिष की बूंदो का मौसम।
एक बारिष की बूंदे देती खुषियों के रंग अनेक
कितना खूबसूरत हैं ये रिष्ता बूंद और प्यासे का
दूर रहूं तो तडपा देती हैं जीवन
और मिल जाये तो प्यास बुझा देती हैं ये बूंद
दिल करता हैं कभी दूर ना जाऊ तुझसे
तु यूंही बरसती रहें और मैं तुझमें समा जाऊं
किसान के लिए लहलहाते खेत हैं
प्यासे के लिए पानी हैं
अंधेरें के लिए बिजली हैं
चटटानों के लिए एहसास हैं
तो समन्दर के लिए सबसे खास हैं
वो हवाओ की सनसनाती हुई लहर बदन के खुले हिस्से को जब स्पर्श कर गुजरती हैं तो गुदगुदी का एहसास पुरे बदन में ठण्ड से रोंगटे खड़े कर देता हैंण् आँखों को बंद कर जब नथुनों में वो गीली मिटटी की खुशबु सुंघाई पड़ती हैं तो बचपन के वो दिन मन में तैरने लगते ठीक उसी तरह जब हम अपने नन्हे दृ नन्हे हाथो से नन्ही दृ नन्ही नाव बनाना सीखे थे और उसे बारिश के पानी में तैराकर ऐसे खुश होते थे जैसे अब अपनी नाव सात समंदर पार करेगी

 

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