पान जमीन पर थूककर हमें वंदेमातरम बोलने का हक नहीं: मोदी

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New Delhi: Prime Minister Narendra Modi after inaugurating an exhibition titled “Swachchhagrah – Bapu Ko Karyanjali - Ek Abhiyan, Ek Pradarshani” organised to mark the 100 years of Mahatma Gandhi’s 'Champaran Satyagraha' at the National Archives of India in New Delhi on Monday. PTI Photo by Shahbaz Khan(PTI4_10_2017_000271A)
गेरुआ कपड़ों में, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की होगी। गुलाम भारत में उसके चिंतन और भाषण में ये कहीं नहीं दिखती थी।”
– “हजार साल की गुलामी के बाद भी उसके मन में विचार उमड़ रहे थे। हमारे देश में ये बात है कि चाहे कितनी भी नेगेटिव बातें क्यों न हों, इस महापुरुष में आखिर कौन सी ताकत थी कि उसके अंदर आग धधक रही थी। और वो दुनिया को एक सार्थक रास्ता दिखाने का प्रयास करता है।”
– “दुनिया को ये पता भी नहीं था कि लेडीज एंड जेंटेलमेंट के अलावा भी कोई शब्द हो सकते हैं। लेकिन जिस वक्त माई ब्रदर्स एंड सिस्टर्स शब्द निकले, हर किसी का दिल जीत लिया।”
विवेकानंद ने हमेशा भारत का महिमामंडन किया
– मोदी ने कहा, “इस महापुरुष ने पल दो पल में हजारों सालों में पनपी सभ्यताओं को अपना बना लिया था। 21वीं सदी की शुरुआत के इस 9/11 में उन्होंने प्रेम और करुणा का संदेश दिया था। उसी अमेरिका में उसी दिन हमला हुआ। तब सबको याद आया कि भारत के दिखाए रास्ते पर न चलकर किस तरह से विकृतिया आ जाती हैं।”
– “विवेकानंद जी के दो रूप देखने को मिलते हैं। जहां भी गए पूरे विश्वास के साथ भारत के महिमामंडन करने में कभी थकते नहीं थे। दूसरे रूप में जब भारत में बात करते थे तो हमारे समाज की बुराईयों पर कठोराघात करते थे। आवाज उठाते थे। तब पूजा-पाठ, अंध परंपराएं थीं।”
– “एक 30 साल का नौजवान ऐसे वक्त में ये कहने कि हिम्मत दिखाता था कि पूजा-पाठ से कोई भगवान नहीं मिलता है। जाओ गरीबों की सेवा करो।”
आज हम लड़कियों को सम्मान से देखते हैं क्या?
– मोदी ने कहा, “संत परंपरा में वे गुरु खोजने नहीं निकले थे। वे सिर्फ सत्य की खोज कर रहे थे। रामकृष्ण परमहंस उन्हें मां काली के पास भेजते हैं। वो कौन सा लौह तत्व होगा उनके अंदर, जिन्होंने मां काली से भी कुछ नहीं मांगा।”
– “अमेरिका में ब्रदर्स एंड सिस्टर्स कहने वाले विवेकानंद की तरह हम आज भारत में लड़कियों को आदर से देखते हैं क्या? जो देखते हैं उन्हें सौ बार नमन करता हूं। अगर नहीं देखते हैं तो विवेकानंद के शब्दों पर हमें तालियां बजाने का हक नहीं है। हम सोंचे कि जन सेवा प्रभु सेवा है। 30 साल का एक नौजवान दुनिया में जय जयकार करके आया हो।”
– “उस वक्त दो घटनाएं हुई। एक ये और दूसरी जब रवींद्रनाथ टैगोर को नोबेल प्राइज मिला। दोनों बंगाल की संतान थीं। मुझे गर्व होता है कि भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश का राष्ट्रगान बनाने वाले मेरे देश के थे।”
…तो वंदेमातरम कहने का हक नहीं
– मोदी ने कहा, “पूरे हिन्दुस्तान से पूछ रहा हूं कि क्या हमें वंदेमातरम् कहने का हक है। मैं जानता हूं कि मेरी बात हजारों लोगों को चोट पहुंचाएगी। हम लोग पान खाकर भारत मां थूंके और कूड़ा कचरा फेंके और फिर वंदेमातरम् बोले, इसके लिए देश में पहला हक किसी को है तो भारत मां के उन सच्चे लोगों को है जो सफाई करते हैं।”
– “इसलिए हम ये जरूर सोचें कि ये हमारी भारत माता सुजलाम सुफलाम भारत माता है। हम सफाई करें या नहीं, लेकिन गंदगी करने का हक नहीं है। गंगा की सफाई करें, स्नान करें लेकिन कोई ये सोचता है कि इसमें कचरा ना डालें। अगर आज विवेकानंद होते तो क्या हमें ये सब करने पर नहीं डांटते?”
– “आज हम स्वस्थ हैं क्योंकि कोई सफाई करने वाला कर्मचारी हमारे आसपास है। इसीलिए मैंने बोल दिया पहले शौचालय फिर देवालय। बहुत लोगों ने मेरे बाल खींच लिए। मुझे खुशी है कि देश में आज ऐसी भी बेटियां हैं, जो शौचालय नहीं होने पर शादी नहीं करती हैं।”
– “स्वामी विवेकानंद ने लोगों को देश की ताकत बताई। हिन्दुस्तान को दुनिया सांप-सपेरों का देश समझते थे। अहम ब्रह्मास्मि और कृणवंतो विश्व आर्यम ये आर्यम शब्द का मतलब है कि हम दुनिया को सुसंस्कृत करेंगे।”
– “विवेकानंद की सफलता का भाव ये था कि उनके अंदर आत्मसम्मान और देश के गौरव का भाव था। तभी देश को रिप्रेजेंट कर पाए। आज हम कोई काम करने जाते हैं तो पहले सोचते हैं कि लगता नहीं है कि ये मुझसे हो पाएगा।”
कुछ लोग मेक इन इंडिया का विरोध करते हैं
– मोदी ने कहा, “जब मैं मेक इन इंडिया कहता हूं तो कई लोग इसका विरोध करते हैं। अगर कोई विवेकानंद और जमशेद जी टाटा के बीच पत्र व्यवहार को देखें तो आप पाएंगे कि विवेकानंद उनसे कहते हैं कि भारत में उद्योग लगाओ ना।”
– “देश में कृषि को वैज्ञानिक ढंग से करने के लिए स्वामीजी उस दौर में करते थे। पहला इंस्टीट्यूट उन्हीं के नाम पर है।”
– “आज आचार्य विनोबा भावे की भी जन्म जयंती है। हम पंडित दीनदयाल उपाध्याय का शताब्दी समारोह मना रहे हैं। विनोबा जी के करीबी थे दादा धर्माधिकारी जी।”
– “उन्होंने लिखा है कि एक युवा सिफारिश के लिए आया तो पूछा कि तुम्हें क्या आता है तो बोला मैं ग्रेजुएट हूं। पूछा टाइपिंग, खाना बनाना आता है तो फिर बोला मैं तो ग्रेजुएट हूं। इसीलिए विवेकानंद ने कहा है कि इंसान के दिल दिमाग में लाइब्रेरी भरी पड़ी है, जो पांच स्किल्स को लेकर जीता है। उसी का महत्व है।”
– “उन्होंने स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया। हमने यही किया है, इसके लिए अलग से एक मिनिस्ट्री बनाई। मेरे देश का नौजवान नौकरी लेने वाला नहीं, देने वाला बनना चाहिए।”
समाज के अंतिम व्यक्ति को भी फायदा मिले
– मोदी ने कहा, “पंडित दीनदयालजी ने भी अंत्योदय की बात कही थी, वे समाज के आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति को फायदा पहुंचाने की बात करते थे। विवेकानंद जी का सपना था कि भारत एक दिन विश्व गुरु बनेगा। अगर हम रूल फॉले करेंगे तब।”
– “आज विवेकानंद, विनोबा भावे और भयानक 9/11 हादसे को याद करने का दिन है। नदियों को मां और पेड़ पौधों को पूजने वाले हम लोग संकटों को दूर करने के लिए कोशिश करें। लेकिन मेरे नौजवानों 2022 में रामकृष्ण मिशन के 125 साल, आजादी के 75 साल पूरे होने पर संकल्प लें।”
– “हमारे देश में कॉलेजों की छात्र राजनीति करने वाले लोगों ने चुनाव में कभी कैंपस की सफाई की बात नहीं कहीं। आज देख सकते हैं कि छात्र राजनीति कहां से कहां पहुंच गई है। चुनाव के बाद वहां कचरा पड़ा होता है। अगर गांधी, विवेकानंद के सपनों का भारत बनाना है तो सफाई का संकल्प लेना होगा। अगर सवा सौ करोड़ देशवासी एक कदम चलें तो हिन्दुस्तान सवा सौ करोड़ कदम चलेगा।”
किसी भी डे मनाने का विरोध क्यों?
– मोदी ने कहा, “मैंने देखा है कि कुछ लोग कॉलेजों में डे मनाते हैं, आज रोज डे है। कुछ लोग इसका विरोध करते हैं। मैं विरोधी नहीं हूं। कॉलेज विचार व्यक्त करने का स्थान है।”
– “क्या हरियाणा का कॉलेज तय करता है कि आज तमिल डे या पंजाब का कॉलेज केरल डे मनाएगा। वहां की संस्कृति को जिएं। क्या इससे एक भारत श्रेष्ठ भारत नहीं बनेगा। हम देश की हर भाषा और लोगों के सम्मान का भाव पैदा करनी चाहिए। हम पंजाब के सिख गुरुओं का डे भी मना सकते हैं। हम रोबोट नहीं बन सकते। क्रिएटिविटी के बिना जीवन संभव नहीं है।”
– “विवेकानंद कुए के मेंढक की कथा सुनाते थे। हम जय जगत वाले लोग हैं। उपनिषद् से उपग्रह तक की हमारी यात्रा पूरी हो गई है। हम कभी डरे नहीं हैं। जो भी आया उसे गले लगा लिया। मैं दूसरे देशों में जाता हूं तो देखता हूं कि हिन्दुस्तान को देखने का दुनिया का नजरिया बदल चुका है।”
– “ये ताकत राजनीति से नहीं आप लोगों से हैं। हमें अपने अंदर की बुराइयों से लड़ना है। हमें देश को सबसे आगे रखना है। क्यों न मेरा नौजवान इसमें भागीदार बनें।”

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