पंजाब होशियारपुर के दिलजीत सिंह राणा बने इंग्लैंड के हाडस आफ लार्ड के पहले भारतीय सदस्य.

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  चंडीगढ़। पंजाब के होशियारपुर में पले बढ़े दिलजीत सिंह राणा ने 54 वर्ष इंग्लैंड में बिताए हैं। विनम्र स्वभाव के इस व्यक्ति के पीछे एक संघर्ष छिपा है, जिसने इन्हें मजदूर से इंग्लैंड की हाउस ऑफ लॉर्ड का सदस्य बनाया। वह पहले भारतीय हैं जो वहां इस हाउस के सदस्य बने। वह गुरुवार को सेक्टर-17 के होटल शिवालिक व्यू में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों की बातें साझा की। साथ ही यह भी कहा कि वह 2030 तक भारत को बदलना चाहते हैं।

पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में स्थित गांव संघोल में दिलजीत के एजुकेशनल इंस्टीट्यूट हैं। यहां दो दिसंबर से इंडिया इन 2030 इन ग्लोबल कॉन्टेकस्ट सेमीनार का आयोजन होना है, जिसमें देश के विभिन्ना शिक्षाविद्, कानून व अर्थशास्त्र के जानकार लोग भारत के विकास पर चर्चा करेंगे। दिलजीत इसी सेमिनार में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। इसमें पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सिकरी, लॉर्ड मेघनाद देसाई, प्रोफेसर टॉम फ्रेजर आदि भी शामिल होंगे।

दिलजीत ने कहा कि भारत के राजनेता बहुत स्वार्थी हैं। हैरानी होती है कि इन नेताओं को रात को नींद कैसे आ सकती है। भारत की सड़कों पर करोड़ों लोग रोज भूखे सोते हैं। सरकार किसानों को भिखारी समझती है। वह उनके लिए ऐसी योजनाएं लेकर आती है जिससे उनका कोई विकास नहीं होता। हालात देखें तो 2020 तक भारत विकसित नहीं बन पाएगा। इसको विकसित करने के लिए अभी 10 से 12 साल लगेंगे। इसलिए हमने अपने सेमिनार का लक्ष्य 2030 का रखा है।

मजदूर से इंग्लैंड के लॉर्ड तक…

दिलजीत 1963 में पंजाब से इंग्लैंड गए। उनकी पहली नौकरी एक फैक्ट्री के मजदूर के रूप में थी, लेकिन आज उनके इंग्लैंड में सात होटल हैं और वह हाउस ऑफ लॉर्ड के मेंबर भी हैं। दिलजीत ने बताया कि उनका गांव पाकिस्तान के लायलपुर (अब फैसलाबाद) में था। जहां से विभाजन के बाद उन्हें पंजाब के होशियारपुर आना पड़ा। यहां गरीबी में दिन कटे।

ग्रेजुएशन के बाद पंजाब सरकार में ही नौकरी मिल गई, लेकिन मन में हमेशा इंग्लैंड जाने की इच्छा रहती थी। फिर नौकरी छोड़ 1963 में इंग्लैंड चला गया और पहली नौकरी एक फैक्ट्री में मजदूर की थी। फिर डाकिए की नौकरी मिली। करीब तीन साल काम करने के बाद खुद का होटल खरीदा। 1967 के बाद उनका व्यापार काफी अच्छा चलने लगा।

मगर उन्हें नस्लवाद का शिकार होना पड़ा और होटल को आग लगा दी गई। फिर दिलजीत ने फैशन बुटीक खोले, पर उसे भी नस्लवाद का शिकार होना पड़ा। दिलजीत ने फिर भी हिम्मत नहीं हारी। यही कारण है कि अब इंग्लैंड में उनके सात होटल हैं, जिन्हें उनके दो बेटे संभालते हैं। 2004 में इंग्लैंड सरकार ने दिलजीत को हाउस ऑफ लॉर्ड का सदस्य बनाया।

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