नरेंद्र मोदी क्यों बोले- लोगों ने तो मेरे बाल नोंच लिए

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विवेकानंद सिर्फ उपदेश देने वाले नहीं थे, उन्होंने आइडिया को क्रियान्वित भी किया. रामकिशन मिशन का जिस भाव से जन्म हुआ आज इतने सालों बाद भी यह आंदोलन उसी भाव से चल रहा है.

नई दिल्‍ली: आज की तारीख में टीम इंडिया के ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या हर जगह छाए हुए हैं, और उनके शानदार खेल की वजह से उनके चाहने वालों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है. अख़बारों में लगातार उनकी तारीफों के पुल बांधे जा रहे हैं, और कहीं-कहीं तो उन्हें ‘भविष्य का कपिल देव’ बताया जा रहा है. निश्चित रूप से हार्दिक पंड्या ने सही मौकों पर सटीक खेल दिखाया है, और बल्ले और बॉल, दोनों से ही टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन हमारे विचार से हार्दिक की तुलना कपिल देव से करना काफी जल्दबाज़ी है, क्योंकि कोई भी उस ऊंचाई तक रातोंरात नहीं पहुंच सकता, और उसके लिए सालों तक शानदार खेल दिखाते रहना ज़रूरी होता है.

हम मानते हैं कि हार्दिक निश्चित रूप से बेहद ‘प्रॉमिसिंग’ क्रिकेटर है, और हम चाहेंगे कि वह भी कपिल देव की ऊंचाइयों को छू पाए, लेकिन दोनों खिलाड़ियों के बीच सबसे बड़ा फर्क यही है कि हार्दिक बैटिंग ऑलराउंडर हैं, जबकि कपिल देव बॉलिंग ऑलराउंडर थे. हार्दिक ने फिलहाल कुल तीन टेस्ट मैच खेले हैं, और तीन टेस्ट मैचों की तीन पारियों में एक शतक तथा एक अर्द्धशतक की मदद से 59.33 के औसत से 178 रन बनाए हैं, और कुल चार विकेट भी चटकाए हैं.

उधर, भले ही कपिल देव के नाम ज़्यादा विश्वरिकॉर्ड न बचे हों, लेकिन वह सही मायनों में क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी हैं, और हमारी मानें तो क्रिकेट के इतिहास के सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर भी हैं, और हमारी समझ से आज भारत में क्रिकेट का जो क्रेज़ मौजूद है, उसके पीछे कपिल देव के कुशल नेतृत्व के योगदान को कतई नकारा नहीं जा सकता. भारत में क्रिकेट का खेल हमेशा से पसंद किया जाता रहा है, लेकिन उसमें जितना पैसा और ‘पब्लिक का पागलपन’ आज दिखाई देता है, उसकी सबसे बड़ी वजह थी, वर्ष 1983 की वर्ल्डकप जीत.

यकीन मानिए, उस टूर्नामेंट के फाइनल में ‘अजेय’ कहलाने वाली वेस्ट इंडीज़ की टीम के खिलाफ जीत के पीछे सिर्फ कपिल देव की कप्तानी ने ही चमत्कार नहीं किया था, बल्कि टूर्नामेंट के लीग दौर में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले गए मैच में कपिल देव की तत्कालीन विश्वरिकॉर्ड 175 रनों की पारी की बदौलत ही हम वह विश्वकप जीत पाए थे. यह जगज़ाहिर है कि उस वर्ल्डकप को जीतने के बाद ही देश में क्रिकेट की लोकप्रियता ने नए आयाम स्थापित किए थे. सो, क्रिकेट की लोकप्रियता को आसमान की बुलंदियों तक पहुंचाने में कपिल देव का योगदान कोई भी नकार ही नहीं सकता.

खुद शानदार प्रदर्शन करने के बाद टीम से बेहतरीन प्रदर्शन करवाना ही कप्तान का दायित्व होता है, सो, उस लिहाज़ से वह बेहतरीन कप्तान रहे. इसलिए आसानी से कहा जा सकता है कि उस दौर में टीम से शानदार प्रदर्शन करवाकर कपिल देव ने ही बीसीसीआई को आज इस मुकाम तक पहुंचाया है, जहां उसे दुनिया की सबसे रईस खेल संस्था कहा जाने लगा है, और यहां तक कहा जाने लगा है कि क्रिकेट से जुड़े मामलों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) से ज़्यादा भारतीय बोर्ड की चलती है.

हमने शुरू में ही लिखा था कि कपिल देव क्रिकेट के इतिहास के सर्वश्रेष्ठ सर्वकालिक ऑल-राउंडर हैं, सो, एक खिलाड़ी के रूप में भी उनका आकलन, तथा अन्य खिलाड़ियों से आंकड़ों के आधार पर उनकी तुलना करना ज़रूरी हो जाता है. ध्यान दें कि कपिल देव ने रिटायर होते वक्त 434 टेस्ट विकेट का आंकड़ा अपने पीछे छोड़ा था, जो कई साल तक विश्वरिकॉर्ड बना रहा. भले ही आज सबसे ज़्यादा टेस्ट विकेट चटकाने वालों की सूची में उनसे आगे छह खिलाड़ी हैं, लेकिन वे सभी खालिस गेंदबाज हैं, और एक भी ऑल-राउंडर नहीं है. कपिल देव आज भी दुनिया के एकमात्र ऑल-राउंडर क्रिकेटर हैं, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 400 विकेट के आंकड़े को पार करने के अलावा 5,000 से अधिक रन भी बनाए.

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