चीन फिर आया हरकत में- डोकलाम के विवादित इलाके से महज 12 किमी दूर सड़क बनाने में जुटा चीन…..

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यह डेवलपमेंट सिक्किम के उसी इलाके में हो रहा है, जहां 28 अगस्त को भारत ने चीन की सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था

  • नई दिल्ली. चीन की सेना डोकलाम पठारी क्षेत्र में जहां सड़क बना रही है, वह पिछली बार के विवादित क्षेत्र से महज 12 किमी दूर है। लिहाजा चीन एक बार फिर डोकलाम मामले को गरमाने में लग गया है। भारतीय अफसरों का दावा है कि चीन इस विवादित क्षेत्र में सड़क का विस्तार कर रहा है। इसमें लगे इम्प्लॉइज को उसके 500 जवान सिक्युरिटी दे रहे हैं। यह डेवलपमेंट सिक्किम के उसी इलाके में हो रहा है, जहां 28 अगस्त को भारत ने आक्रामक रणनीति अपनाकर चीन की सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। चीन और भूटान दोनों डोकलाम क्षेत्र पर अपना दावा करते हैं। उधर, इलाके में भूटान के दावे का फिर से समर्थन करते हुए भारत ने साफ कर दिया है कि डोकलाम के दक्षिण में स्थित ‘चिकन नेक’ के पास चीन के किसी भी तरह के डेवलपमेंट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डोकलाम में सेना बढ़ा रहा चीन
    न्यूज एजेंसी के मुताबिक सूत्रों का कहना है कि चीन डोकलाम में धीरे-धीरे सेना बढ़ा रहा है। लिहाजा क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ सकता है।
    सूत्रों की मानें तो विवादित जगह से महज 12 किमी की दूरी तक चीनी सेना सड़क बना रही है। 
    इस बीच एयरचीफ मार्शल बीएस धनोआ ने गुरुवार को कहा कि चुम्बी घाटी में चीनी सेना मौजूद है। हम उम्मीद करते हैं कि वो वहां से जल्दी ही लौट जाएंगे। एयरफोर्स की एनुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में धनोवा ने बताया कि चीनी सेना की मौजूदगी के बावजूद डोकलाम में भारत और चीन की सेना आमने-सामने नहीं हैं।
    एयरफोर्स चीफ ने कहा- दोनों सेनाएं आमने-सामने नहीं हैं। दोनों देश इस क्षेत्र की बड़ी पॉलिटिकल और इकोनॉमिक पावर हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि समझदारी दिखाई जाएगी और इस समस्या को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लिया जाएगा। क्योंकि, यही दोनों देशों के हित में है। इसके लिए पॉलिटिकल और डिप्लोमैटिक लेवल पर कोशिशें की जानी चाहिए।
    हमारी सीमा में नहीं घुसा था चीन
    धनोवा ने कहा कि ढाई महीने चले डोकलाम विवाद के दौरान चीन भारत के एयर स्पेस में दाखिल नहीं हुआ था। हालांकि, उसकी एयरफोर्स तिब्बत में दो जगहों पर मौजूद है। 
    धनोआ ने कहा- गर्मियों में चीन की एयरफोर्स तिब्बत में एक्सरसाइज करती है। यहां उनके दो एयरफील्ड हैं। जब डोकलाम विवाद चल रहा था तब भी चीन की एयरफोर्स इस इलाके में मौजूद थी। हमें लगता है कि जैसे-जैसे सर्दियां आएंगी, चीन की फोर्स वापस चली जाएगी।
    एयर चीफ मार्शल ने कहा- दोनों देशों के फाइटर जेट अपने-अपने इलाकों में उड़ान भरते हैं और अपनी सीमा में भी एलएसी से 20 किलोमीटर अंदर उड़ाते हैं। टकराव जमीन पर हुआ था, लेकिन आसमान में ऐसा कुछ नहीं हुआ। डोकलाम विवाद के दौरान हमने इंटेलिजेंस और सर्विलांस पर ही फोकस रखा। हालांकि, हम किसी भी हालात से निपटने के लिए हरदम तैयार रहते हैं।
    क्या बोले थे आर्मी चीफ?
    डोकलाम विवाद हल होने के बाद आर्मी चीफ बिपिन रावत ने इशारा किया था कि चीन ने अपनी मसल्स को रिलेक्स करना शुरू कर दिया है। उन्होंने वॉर्निंग दी थी कि भारत की नॉर्दर्न बॉर्डर पर बड़ी जंग हो सकती है।
    ये रिपोर्ट्स भी आई थीं कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) यातुंग की फॉरवर्ड पोस्ट पर सेना बढ़ा रही है। 
    अफसरों की मानें तो चीनी सेना डोकलाम में डिप्लॉय की जा चुकी हैं। वे ठंड के वक्त इलाका छोड़ देंगी। हालांकि इस बात के कोई संकेत नहीं मिले कि चीनी सेना इस वक्त तक इलाका छोड़ देगी।
    चीन ने जारी की एडवाइजरी
    चीन ने भारत जाने वाले अपने सिटिजंस के लिए ट्रेवल एडवाइजरी जारी की है। नई दिल्ली स्थित चीनी एम्बेसी ने कहा कि अंडमान-निकोबार और अन्य विवादित क्षेत्र में जाने के लिए वीजा नहीं दिया जाएगा। चीन ने चार महीने में तीसरी बार ऐसी चेतावनी जारी की है।
    डोकलाम विवाद क्या था?
    चीन सिक्किम सेक्टर के डोकलाम इलाके में सड़क बना रहा था। यह घटना जून में सामने आई थी। डोकलाम के पठार में ही चीन, सिक्किम और भूटान की सीमाएं मिलती हैं। भूटान और चीन इस इलाके पर दावा करते हैं। भारत भूटान का साथ देता है। भारत में यह इलाका डोकलाम और चीन में डोंगलोंग कहलाता है।
    चीन ने 16 जून से यह सड़क बनाना शुरू की थी। भारत ने विरोध जताया तो चीन ने घुसपैठ कर दी थी। चीन ने भारत के दो बंकर तोड़ दिए थे। लेकिन, जब भारतीय सेना ने सख्ती दिखाई तो चीन ने सड़क का काम रोक दिया। 72 दिन बाद यह विवाद अगस्त में मोदी के चीन दौरे के पहले हल हुआ। दोनों सेनाएं पीछे हट गईं। 
    दरअसल, सिक्किम का मई 1975 में भारत में विलय हुआ था। चीन पहले तो सिक्किम को भारत का हिस्सा मानने से इनकार करता था। लेकिन 2003 में उसने सिक्किम को भारत के राज्य का दर्जा दे दिया। हालांकि, सिक्किम के कई इलाकों को वह अपना बताता रहा है।

 

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