कोचिन देवस्‍वाम बोर्ड ने दलित को बनाया मंदिर का पुजारी…

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कोचिन देवस्‍वाम बोर्ड ने भी दलित पुजारियों के लिए खोले अपने दरवाजे
इससे पहले त्रावनकोर देवस्वाम बोर्ड द्वारा इस तरह का कदम उठाया गया था। अब कोचिन देवस्‍वाम बोर्ड ने भी अपने मंदिरों में पहला दलित पुजारी नियुक्‍त कर दिया है।

नई दिल्‍ली, जेएनएन। केरल के मंदिरों में जातिवाद को खत्‍म करने की दिशा में एक और सराहनीय कदम उठाया गया है। यहां मैथिलकम के रहने वाले कुझुपुली उमेश कृष्णन कोचिन देवस्‍वाम बोर्ड के अंतर्गत आने वाले मंदिरों में पहले दलित पुजारी बन गए हैं। इससे पहले त्रावनकोर देवस्वाम बोर्ड द्वारा इस तरह का कदम उठाया गया था।

कृष्णन ने यहां मंजलिकुलम स्थित महादेव मंदिर के पवित्र स्‍थान की जिम्‍मेदारी संभाल ली है। उन्‍होंने बुधवार को सेवानिवृत्त पुजारी, बी एन बालाकृष्णन एम्ब्रांतिरी की जगह ली। इस मौके पर भक्‍तों समेत कई गणमान्‍य अधिकारी मौजूद थे। कृष्‍णन ने कहा कि यह भगवान का आशीर्वाद है। वह पिछले 12 सालों से विभिन्‍न मंदिरों में बतौर पुजारी काम करते आ रहे हैं। उनके परिवार वाले भी ऐतिहासिक पल का गवाह बने।

गौरतलब है कि पिछले महीने त्रावनकोर देवस्वाम बोर्ड ने 22 वर्षीय यदुकष्‍णन को 150 साल पुराने मणप्पुरम शिव मंदिर के पहले दलित पुजारी के रूप में नियुक्‍त किया था।

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