किन वजहों से 5 दिन में तीसरी बार बैकफुट पर आया चीन, क्या थे झुकने के कारण….

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सोमवार को जारी हुए ब्रिक्स के ज्वाइंट डिक्लेरेशन में पाकिस्तान के लश्कर, जैश जैसे आतंकी गुटों को खतरा बताया गया था।

ई दिल्ली/बीजिंग. ब्रिक्स समिट में मंगलवार को भारत को बड़ी कामयाबी मिली। नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच बाइलेट्रल टॉक हुई। चीन ने कहा कि वह भारत के साथ पंचशील के सिद्धांतों पर साथ काम करने के लिए तैयार है। सोमवार को जारी हुए ब्रिक्स के ज्वाइंट डिक्लेरेशन में पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे गुटों को दुनिया के लिए खतरा बताया गया था। बीते 5 दिन में चीन को अपने स्टेंड पर तीन बार पीछे हटना पड़ा। बता दें कि 72 दिन चला भारत-चीन डोकलाम विवाद 28 अगस्त को खत्म हो गया था। विवाद के दौरान चीन की तरफ से कई बार धमकियां दी गई थीं। ब्रिक्स में दूसरे देशों को भी शामिल करना चाहता था…
1) 31 अगस्त: BRICS प्लस बनाने की कोशिशों से पीछे हटना पड़ा
BRICS में किन्हें शामिल करना चाहता था चीन
– थाईलैंड, मिस्र, ताजिकिस्तान, मैक्सिको और गिनी 5 कॉन्टिनेंट को रिप्रेजेंट करते हैं। ये चीन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट वन बेल्ट-वन रोड (OBOR) में अहम रोल निभा सकते हैं। चीन अपने इस प्रोजेक्ट में कई देशों को शामिल कर ट्रांसपोर्ट नेटवर्क बनाना चाहता है।
किस वजह से जोर दे रहा था चीन?
– BIMSTEC (बे ऑफ बंगाल इनीशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्नीकल एंड इकोनॉमिक) के पिछले साल गोवा में हुई समिट में भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल शामिल हुए थे।
– चीन का कहना है कि रूस, ब्राजील और साउथ अफ्रीका को भी इसमें शामिल करना चाहिए, क्योंकि ये ब्रिक्स में शामिल हैं।
उसे क्यों पीछे हटना पड़ा?
– 31 अगस्त को चीन को ब्रिक्स प्लस बनाने की अपनी योजना से पीछे हटना पड़ा। ब्रिक्स में भारत समेत 5 देश शामिल हैं।
– चीन की फॉरेन मिनिस्टर वांग यी ने संकेत दिया कि हम ब्रिक्स में मेंबर देशों के अलावा किसी और को शामिल करने पर विचार नहीं कर रहे।
तुरंत बदला रुख: उसी दिन फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन हुआ चुनयिंग ने कहा, “हमारी देशों के साथ मल्टी-लेट्रल मीटिंग हो चुकी हैं। अभी भी मीटिंग हो रही हैं। अगर वक्त रहा तो हम इसके लिए कोशिशें करेंगे।”
2) 4 सितंबर: चीन चाहता था पाक का मुद्दा न उठाए भारत, लेकिन उसकी नहीं चली
चीन क्या चाहता था?
– चीन ने भारत को नसीहत दी थी कि वह पाक स्पॉन्सर्ड टेररिज्म का मसला ब्रिक्स में न उठाए।
– चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री ने कहा था- आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के रुख पर भारत की कुछ चिंताएं होती हैं। लेकिन यह ब्रिक्स के प्लेटफॉर्म पर उठाने लायक सब्जेक्ट नहीं है।
भारत ने क्या किया?
– ये भारत के दबाव का असर रहा कि ब्रिक्स के ज्वाइंट डिक्लरेशन में ISIS, तालिबान, अलकायदा, ईस्टर्न तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट, इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उज्बेकिस्तान, हक्कानी नेटवर्क, जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान आौर हिज्ब-उत-तहरीर का जिक्र हुआ।
– इनमें से कई टेरर ग्रुप्स पाकिस्तान से ऑपरेट करते हैं। आतंकवाद के मुद्दे पर अलग-थलग पड़ने के डर से चीन भी अपने दोस्त पाकिस्तान के खिलाफ खड़ा होने को मजबूर हुआ।
– चीन की जब किरकिरी हुई तो उसने कहा कि जैश और लश्कर की हिंसक गतिविधियों के कारण उसका नाम ज्वाइंट डिक्लरेशन में जुड़ा है।
– फॉरेन मामलों के एक्सपर्ट रहीस सिंह का कहना है- अब सवाल यह है कि क्या चीन पाकिस्तान को ‘आॅल वेदर फ्रेंड’ की कैटेगरी से बाहर कर देगा?
3) 5 सितंबर: चीन को याद आया नेहरू का पंचशील सिद्धांत
क्या हुआ: शियामेन में नरेंद्र मोदी और चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग की बाइलेट्रल मीटिंग हुई। सिक्किम के डोकलाम एरिया में गतिरोध के बाद दोनों लीडर पहली बार मिले।
चीन ने क्या कहा: जिनपिंग ने कहा, “चीन पंचशील के 5 सिद्धांतों पर भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।”
क्या हैं इसके मायने?
– ये चीन के रुख में नरमी का इशारा है। जो चीन डोकलाम के मसले पर पिछले महीने तक तल्ख बयान दे रहा था, उसके प्रेसिडेंट को मोदी से मिलने के बाद यह कहना पड़ा कि वह पंचशील सिद्धांत पर काम आगे बढ़ाना चाहता है।
– पंचशील के मायने हैं- एक-दूसरे की रीजनल इंटीग्रिटी और सोविरनिटी (sovereignty) का सम्मान करना, दूसरे देश के अंदरूनी मसलों में दखल न देना, एकदूसरे पर हमला न करना, आपसी कोऑपरेशन, एक-दूसरे के हितों को बढ़ावा देना और शांतिपूर्ण सह अस्तित्व (Peaceful Coexistence) की पॉलिसी पर अमल करना।
किन 3 वजहों से मजबूर हुआ चीन?

1) उदार मेजबान बनना चाहता था चीन
– डोकलाम मुद्दे पर चीन के कुछ नरम पड़ने के साथ ही यह लगने लगा था कि चीन ब्रिक्स सम्मेलन में खुद को एक उदार मेजबान की तरह पेश करने की कोशिश करेगा। चीन के इस नजरिए से भारत को ब्रिक्स में डिप्लोमैटिक कामयाबी हासिल हुई है।

2) अपने प्रोजेक्ट्स के लिए चीन को भारत की जरूरत
– चीन ने भारत को झुकाने के लिए डोकलाम में एक मुद्दा खड़ा कर दिया लेकिन भारत न झुका, न पीछे हटा। इस वजह से भी चीन को अपनी स्ट्रैटजी बदलनी पड़ी। ‘वन बेल्ट वन रोड’ (OBOR) को पूरा करने के लिए चीन को भारत की जरूरत है। चाइना-पाक इकोनाॅमिक काॅरिडोर (CPEC) और न्यू मैरीटाइम सिल्क रूट OBOR से ही जुड़ा है। अगर भारत OBOR का विरोध जारी रखता है तो चीन के इस प्रोजेक्ट में देरी होगी। इससे उसकी इकोनॉमिक कॉस्ट बढ़ेगी। चीन यही नहीं चाहता।
3) डेट ट्रैप में उलझे चीन को ब्रिक्स में भारत की जरूरत
– चीन दूसरे देशों को कर्ज बांटने के बाद उन्हें ‘डेट ट्रैप’ में फंसाने में कामयाब हो गया है। हालांकि, अब वह खुद भी ट्रैप में उलझ गया है। OBOR के लिए उसे बड़े कर्ज की जरूरत है। ये कर्ज ब्रिक्स बैंक उसे मुहैया करा सकती है, जहां भारत के पास वीटो पावर है। यही वजह है कि भारत को अपने पक्ष में करने के लिए चीन को झुकने की जरूरत थी।
– बता दें कि चीन श्रीलंका और बांग्लादेश को 24-24 अरब डॉलर का लोन देना चाहता है। पाकिस्तान को भी वह 1 अरब डॉलर का लोन दे रहा है।
क्या था सीमा विवाद?
– चीन सिक्किम सेक्टर के डोकलाम इलाके में सड़क बना रहा था। यह घटना जून में सामने आई थी। डोकलाम के पठार में ही चीन, सिक्किम और भूटान की सीमाएं मिलती हैं। भूटान और चीन इस इलाके पर दावा करते हैं। भारत भूटान का साथ देता है। भारत में यह इलाका डोकलाम और चीन में डोंगलोंग कहलाता है।
– चीन ने 16 जून से यह सड़क बनाना शुरू की थी। भारत ने विरोध जताया तो चीन ने घुसपैठ कर दी थी। चीन ने भारत के दो बंकर तोड़ दिए थे। 72 दिन चले टकराव में चीन ने अपने विदेश मंत्रालय और सरकारी मीडिया के जरिए भारत को कई धमकियां दीं। हालांकि, भारत की तरफ से संयमित बयान दिए गए। सुषमा स्वराज ने संसद में कहा कि बातचीत से ही इस मसले का हल निकलेगा।
– इसी बीच, 15 अगस्त को चीन के कुछ सैनिकों ने लद्दाख की पेंगगोंग लेक के करीब भारतीय इलाके में घुसपैठ की कोशिश की। भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों को रोकने की कोशिश की। इसके बाद दोनों देशों के सैनिकों के बीच पहले हाथापाई हुई। इसके बाद मामला पत्थरबाजी तक पहुंच गया।

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