ऐसे करे दीवाली में लक्ष्मी पूजन ,होगी धन की वर्षा

13
816
views

लक्ष्मी पूजन विधि
आप हाथ में अक्षत, पुष्प और जल ले यह सब हाथ में लेकर संकसंकल्प मंत्र को बोलते हुए संकल्प कीजिए जहां गृहस्थ और वाणिज्य वर्ग के लोग धन की देवी लक्ष्मी से समृद्धि और वित्तकोष की कामना करते हैं कि मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर अमुक देवी.देवता की पूजा करने जा रहा हूं जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हो, सबसे पहले गणेश जी व गौरी का पूजन कीजिए, वहीं साधु-संत और तांत्रिक कुछ विशेष सिद्धियां अर्जित करने के लिए रात्रिकाल में अपने तांत्रिक कर्म करते हैं
प्रदोष काल मंदिर मे दीप दान, रंगोली और पूजा की पूर्ण तयारी कर लेनी चाहिए, इसी समय मे मिठाई वितरण कार्य भी संपन्न कर लेना चाहिए, द्वार प़र स्वस्तिक और शुभ लाभ का सिन्दूर से निर्माण भी इसी समय करना चाहिए


विशेष रूप से श्री गणेश, श्री महालक्ष्मी पूजन, कुबेर पूजन, व्यापारिक खातों का पूजन, दीपदान, अपने सेवकों को वस्तुएं दान करने के लिये शुभ रहेगा प्रदोष काल मंदिर मे दीप दान, रंगोली और पूजा की पूर्ण तयारी कर लेनी चाहिए, इसी समय मे मिठाई वितरण कार्य भी संपन्न कर लेना चाहिए द्वार प़र स्वस्तिक और शुभ लाभ का सिन्दूर से निर्माण भी इसी समय करना चाहिए

BSNL ने दी जियो को टक्कर दीवाली में BSNL लाया बंपर ऑफर्स आपने रिचार्ज कराया क्या….

दिवाली हिन्दू धर्म का मुख्य पर्व है। रोशनी का पर्व दिवाली कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है। दिवाली को दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि दीपों से सजी इस रात में लक्ष्मीजी भ्रमण के लिए निकलती हैं और अपने भक्तों को खुशियां बांटती हैं। दिवाली मनाने के पीछे मुख्य कथा विष्णुजी के रूप भगवान श्री राम से जुड़ी है।

पूजा की सामग्री
1. लक्ष्मी व श्री गणेश की मूर्तियां(बैठी हुई मुद्रा में)
2. केशर, रोली, चावल, पान, सुपारी, फल, फूल, दूध, खील, बताशे, सिंदूर, शहद, सिक्के, लौंग
3. सूखे मेवे, मिठाई, दही, गंगाजल, धूप, अगरबत्ती, 11 दीपक
4. रूई तथा कलावा नारियल और तांबे का कलश चाहिए

पूजा की तैयारी
चौकी पर लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियाँ इस प्रकार रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहें लक्ष्मीजी,गणेशजी की दाहिनी ओर रहें पूजनकर्ता मूर्तियों के सामने की तरफ बैठे कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का अग्रभाग दिखाई देता रहे व इसे कलश पर रखें यह कलश वरुण का प्रतीक है
लक्ष्मीजी की ओर श्री का चिह्न बनाएँ, गणेशजी की ओर त्रिशूल, चावल का ढेर लगाएँ, सबसे नीचे चावल की नौ ढेरियाँ बनाएँ, छोटी चौकी के सामने तीन थाली व जल भरकर कलश रखें तीन थालियों में निम्न सामान रखें


ग्यारह दीपक(पहली थाली में)
खील, बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चन्दन का लेप सिन्दूर कुंकुम, सुपारी, पान (दूसरी थाली में)
फूल, दुर्वा चावल, लौंग, इलायची, केसर-कपूर, हल्दी चूने का लेप, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक, (तीसरी थाली में)

 

13 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here