एक नजर मुसलमानो की देश भक्ति पर……………..

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जम्मू कश्मीर एक मुददा जिसकी गम्भीर बुनियाद देश की आजादी के साथ शुरू हुई। बंटवारे में एक जंग का बीज बोया जा चुका था। देश के बंटवारे के साथ हुये हिन्दू और मुसलमान के बीच में दर्द, नफरत की ये ना मिटने वाली जैसी लकीर को खींच दिया गया। एक ऐसी आजादी जिससे हमें देश में अपना हक तो मिला लेकिन घाव से भरा हुआ मन कितने लोग जो इस बंटवारे से अलग हो गये। भाई-भाई को एक दूसरे से अलग होना पडा। और बंट गये दो टुकडों में। भारत पाकिस्तान में खींची ये लकीर दिलों को चीरती हुयी ना जाने कब नफरत में बदल गयी। आज दोनो देश में जनता जहाॅ चैन से जीना चाहती हैं, शांति कायम करना चाहती हैं, वहीं पर देश के कुछ गददार देश को एक नहीं होने देना चाहते हैं। क्या ऐसे लोग कभी भी किसी मुल्क के वफादार हो सकते हैं जो अपने भाईयों की खुशी में नफरत के बीज बोना चाहते हो अपने ही मुल्क को सारी दुनिया के सामने बदनाम करना चाहते हो। वो भी दिन थे जब दोनो मुल्कों ने मिलकर देश की आजादी की मांग की थी हिन्दुस्तान जैसे देश में मुस्लिम समाज को अलग कानून दिया जाता हैं, हज यात्रा के लिए सब्सिडी दी जाती हैं, नमाज में लाउडस्पीकर लगाने के लिए इनको परमिशन दी जाती हैं। किसी तरह का भेदभाव इनसे नहीं किया जाता हैं और सरकार द्वारा इनके लिए अलग से स्क्रिम तैयार की जाती हैं। परन्तु क्या कभी मुस्लिम समाज ने इस देश को वफादारी दी हैं। कभी दिल से देश के प्रति भक्ति प्रदर्शित की हैं। भारत में ऐसे भी कुछ मुस्लिम हुये हैं जिनकोे इस देश ने अपनी सरआंखों में रखा हैं। जिनकी यादें, जिनके आदर्श, जिनकी यादे आंखों से आंसू निकाल देते हैं। जिनके लिये दिलों में कभी जगह कम नही हो सकती हैं। वहीं पर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो देश की शहादत को खत्म करने में तुले हैं। जिन्होंने उन मुस्लिम समाज के वफादार लोगों की भक्ति पर कीचड उछाला हैं। अपने ही देश को जो लोग अपना नहीं समझते देश की हार में अपने ही देश में पटाखे फोडे जाते हैं। कश्मीरी मुस्लिम आंतकवाद में अपना समर्थन देती हैं। जिन्होने 1965 की लडाई में हथियार छोड दिये। किस हक ये लोग कह सकते हैं ये देश इनका हैं। जिस देश में वन्दे मातरम बोलने पर इनकी जीभ कट जाती हैं। 52 सेकेण्ड का राष्ट्रगान गाने पर ये गूंगे हो जाते हैं। जो हर बात पर अपने अल्ला की दुहायी देेते हैं। दिन में पांच बार नमाज का शोर सुनना पडता हैं। ऐसे लोग कैसे प्रमाणित कर सकते हैं ये हिन्दूस्तान के वासी हैं। जिस समाज को फर्ज निभाना नहीं आता वो हक की बात कैसे कर सकता है।

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