आम आदमी पार्टी को लेकर कुमार विश्वास की बेचैनी..

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कभी कुमार के खासमखास रहे अरविंद केजरीवाल ने उन्हें 2 नवंबर को होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय परिषद से किनारे कर दिया है. जबकि इससे पहले पार्टी की चार राष्ट्रीय परिषद में कुमार ने संचालन किया था.

‘कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है! मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है! मैं तुझसे दूर कैसा हूं, तू मुझसे दूर कैसी है! ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है…!’

इन लाइनों को लिखने वाले कुमार विश्वास इन दिनों आम आदमी पार्टी के विश्वास और अविश्वास के बीच उलझे हुए हैं. पार्टी और पद को लेकर उनकी बेचैनी क्यों और कैसी है, यह या तो वे समझ रहे होंगे या फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल.

कितनी पुरानी है कुमार-केजरीवाल में दरार?

2014 के लोकसभा चुनाव से दोनों नेताओं में यह तल्‍खी शुरू होती है वरिष्‍ठ पत्रकार सुभाष निगम के मुताबिक ‘कुमार चाहते थे कि आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनाव लड़ने की बजाय दिल्‍ली में फोकस करे. लेकिन उनकी राय नहीं मानी गई.’

पार्टी ने पूरी ताकत केजरीवाल के चुनाव क्षेत्र बनारस में लगाया. जबकि कुमार अमेठी में राहुल गांधी और स्‍मृति ईरानी के सामने अकेले पड़ गए.जबकि ”विश्‍वास गाजियाबाद से चुनाव लड़ना चाहते थे. लेकिन उन्‍हें भेज दिया गया अमेठी

‘इस साल की शुरुआत में हुए पांच राज्‍यों के विधानसभा चुनाव में उन्‍होंने पंजाब में प्रचार करने की इच्‍छा जताई थी. पंजाब में नशे के खिलाफ गाना तैयार किया. लेकिन केजरीवाल ने न उन्‍हें पंजाब भेजा और न उन्‍हें स्‍टार प्रचारकों में जगह मिली.’

हालांकि आम आदमी पार्टी इस बार उनकी मांगों के आगे झुक गई. विश्‍वास पर आरोप लगाने के आरोप में अमानतुल्ला खान को सस्‍पेंड कर दिया गया. कुमार को राजस्थान का प्रभारी बना दिया. लेकिन यह कवायद सिर्फ रिपेयरिंग थी. मन के अंदर का मैल दूर नहीं हुआ था.

कुमार ने वहां काम शुरू किया. नतीजा यह हुआ कि छात्र संघ चुनाव में पार्टी की छात्र इकाई ने शानदार प्रदर्शन किया. लेकिन अब अमानतुल्ला खान का निलंबन रद्द होते ही कुमार का गुबार फूट पड़ा. अब ऐसा दौर चल रहा है जिसमें आम आदमी पार्टी के कई वरिष्‍ठ नेताओं का कुमार से ‘विश्‍वास’ उठ रहा है.

 
दिल्‍ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने 30 अप्रैल को ट्वीट किया था कि ‘कुमार मेरा छोटा भाई है. कुछ लोग हमारे बीच दरार दिखा रहे हैं, ऐसे लोग पार्टी के दुश्मन हैं. वो बाज आएं. हमें कोई अलग नहीं कर सकता.’ केजरीवाल का यह ट्वीट बताता है कि दरार तो पुरानी है.

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