अयोध्या में राम मंदिर के लिए पत्थर तराशने का 65% काम पूरा…….

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रजनीकांत नाम के ये कारीगर वही शख्स हैं, जिनके तराशे गए पत्थर अक्षरधाम मंदिर में लगे हैं।

1 अगस्त दोपहर 2 बजे। अयोध्या के कारसेवकपुरम परिसर गेट के बाहर लोगों की भीड़ लगी थी। अंदर टीन शेड के नीचे छेनी और हथौड़ी की आवाजें गूंज रही थीं। परिसर के किनारे राम मंदिर निर्माण के लिए तराशे गए पत्थर एक के ऊपर एक रखे हुए थे। लोगों की भीड़ परिसर में रखे पत्थरों को देखने के लिए उत्सुक दिख रही थी। साथ ही शीशे के शेड में राम मंदिर  निर्माण के मॉडल का लोग आकर दर्शन कर रहे थे। बता दें, कारसेवकपुरम में 25 साल से पत्थर तराशने का काम चल रहा है।अक्षरधाम में मंदिर निर्माण के लिए पत्थर तराशने वाले ही राम मंदिर के लिए तराश रहे पत्थर

पत्थर तराशने और उन पर नक्काशी का काम रजनीकांत नाम के कारीगर कर रहे हैं। ये रजनीकांत वही शख्स हैं, जिनका गुजरात के अक्षरधाम मंदिर के निर्माण में भी अहम रोल था। उनके तराशे गए पत्थर अक्षरधाम मंदिर में लगे हैं।
रजनीकांत बीते 4 सालों से अयोध्या के कारसेवकपुरम में अपने साथियों के साथ डेरा जमाए हैं। अब तक वे मंदिर निर्माण लिए जरूरी 65% काम पूरा भी कर चुके हैं।

पुश्तैनी काम है पत्थर तराशने का45 साल के रजनीकांत मूलरूप से गुजरात के ही रहने वाले हैं। उन्हें पत्थरों को तराश कर उन पर नक्काशी करने की महारत हासिल है। रजनीकांत के पिता और दादा भी पत्थरों पर नक्काशी का काम किया करते थे।  रजनीकांत ने बताया, ”मैं गुजरात के अक्षरधाम मंदिर में लगे पत्थरों को भी तराश चुका हूं। इसके बाद मुझे खासतौर पर अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में लगने वाले पत्थरों को तराशने के लिए बुलाया गया।”
”मैं अपने कई साथियों के साथ करीब 4 साल पहले अयोध्या आया था। तब से कारसेवकपुरम में पत्थरों को तराश रहा हूं।”
– रजनीकांत बताते हैं, ”हमारी रोजी-रोटी का जरिया पत्थर की नक्काशी ही है। मैं इसी काम से परिवार का गुजारा करता हूं। इस काम के लिए हमें हर चौथे दिन पैसों का पेमेंट किया जाता है।”

एक पत्थर पर फूल की नक्काशी करने में लगते हैं दो महीनेरजनीकांत कहते हैं, ”मैं बीते चार सालों में मंदिर निर्माण के लिए अकेले ही कई सौ पत्थरों को तराश चुका हूं। यहां पर सभी तरह की सुविधाएं हैं। गर्मी में पंखा, ठंड के महीने में आग का अलाव जलाया जाता है।”  ”पत्थरों पर फूलों की नक्काशी के लिए बेहद बारीकी से काम होता है। फूलों की नक्काशी के लिए कम से कम दो महीने का टाइम लग जाता है। मॉनिटरिंग करने के लिए दो सुपरवाइजर हैं।”

65 फीसदी काम हो चुका है पूरा रजनीकांत के मुताबिक, ”65 फीसदी पत्थरों को तराश कर तैयार किया जा चुका है। जब सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर आएगा, तब मंदिर बनेगा। हर कोई यहां आकर यही पूछता है कि मंदिर कब बनेगा। अगर आज कोर्ट का ऑर्डर हो जाए तो 5-6 साल में मंदिर लगभग बनकर तैयार हो जाएगा। ये भी उस स्थ‍िति में, जब दिन-रात काम किया जाएगा। बाकी बचे हुए काम को पूरा करने के लिए हम लगातार जुटे हुए हैं।”

 

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